S Jaishankar News: जब एस. जयशंकर 2009 से 2013 के बीच चीन में भारत के राजदूत थे, तब भारत की विदेश नीति को आम तौर पर काफी संयमित माना जाता था. उस दौर में भारतीय राजनयिक बातचीत, धैर्य और टकराव से बचने को कूटनीति का अहम हिस्सा मानते थे. जयशंकर के बीजिंग में राजदूत रहते चीन के साथ ‘स्टेपल्ड वीजा’ का मुद्दा भी काफी चर्चा में रहा था. चीन अरुणाचल प्रदेश के लोगों को ऐसे वीजा जारी करता था, जिन्हें पासपोर्ट पर चिपकाया जाता था. बाद में जम्मू-कश्मीर के कुछ लोगों के लिए भी ऐसी व्यवस्था की खबरें सामने आईं. भारत ने इस नीति पर आपत्ति जताई और कहा कि भारतीय नागरिकों के लिए वीजा जारी करने में एक समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.
इस मुद्दे को भारत ने अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता से जुड़ा संवेदनशील मामला माना. इसी दौर में चीन के साथ सीमा और क्षेत्रीय दावों को लेकर मतभेद भी बने हुए थे. जयशंकर के राजदूत रहते भारत की ओर से चीन के कदमों का जवाब देने को लेकर एक अलग तरह का रुख चर्चा में आया. कुछ रिपोर्टों और विश्लेषणों में इसे ‘जैसे को तैसा’ वाली कूटनीति के उदाहरण के तौर पर बताया गया है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग विवरण मिलते हैं, इसलिए इसे जयशंकर की व्यक्तिगत नीति के रूप में निश्चित तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा.
बीजिंग में चीन की नीति का जवाब देने का तरीका
चीन की ओर से स्टेपल्ड वीजा जारी किए जाने को भारत ने स्वीकार नहीं किया था. विदेश मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, भारत ने चीन से साफ कहा था कि भारतीय नागरिकों के लिए वीजा जारी करने की एक समान व्यवस्था होनी चाहिए. भारत ने 2009 में अपने नागरिकों को यह भी सलाह दी थी कि पासपोर्ट से अलग कागज पर स्टेपल किए गए चीनी वीजा को यात्रा के लिए वैध नहीं माना जाएगा.
जयशंकर के कूटनीतिक करियर के इस दौर को बाद के वर्षों में भारत की अधिक सक्रिय विदेश नीति के संदर्भ में भी देखा गया. इस सोच में यह बात प्रमुख रही कि अगर किसी देश की नीति से भारत के हित प्रभावित होते हैं, तो सिर्फ विरोध दर्ज कराने के बजाय अपने हितों के मुताबिक जवाब भी दिया जा सकता है.
UNGA में आतंकवाद पर जयशंकर का सख्त संदेश
सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जयशंकर के भाषण में भी आतंकवाद को लेकर भारत का सख्त रुख सामने आया. उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने की कोशिशों पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि भारत अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेगा और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सरकारों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए.
हालांकि, जयशंकर के भाषण का पूरा फोकस केवल पाकिस्तान या आतंकवाद पर नहीं था. उन्होंने दुनिया में बढ़ते युद्ध, संघर्ष, आर्थिक दबाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन संकटों का असर उन देशों पर भी पड़ता है जो सीधे किसी संघर्ष का हिस्सा नहीं होते. इसके अलावा उन्होंने खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों तथा सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव की बात भी उठाई.
‘The India Way’ में जयशंकर ने समझाई अपनी सोच
जयशंकर ने 2020 में अपनी किताब ‘The India Way: Strategies for an Uncertain World’ में बदलती दुनिया में भारत की विदेश नीति को लेकर अपनी सोच विस्तार से रखी थी. किताब में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए दुनिया की बड़ी शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखने चाहिए. उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत के लिए ज्यादा सक्रिय और लचीली कूटनीति की जरूरत पर भी बात की है.
इस सोच को अक्सर ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ यानी अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग देशों के साथ अपने हित के मुताबिक सहयोग करने के नजरिए से जोड़ा जाता है. इसका मतलब यह है कि भारत को किसी एक शक्ति या गुट पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंधों को मुद्दे और जरूरत के हिसाब से आगे बढ़ाना चाहिए.
अमेरिका और रूस दोनों के साथ भारत करेगा काम
इस नीति के तहत भारत अमेरिका के साथ इंडो-पैसिफिक और सुरक्षा के मुद्दों पर सहयोग कर सकता है, रूस के साथ पुराने रणनीतिक और ऊर्जा संबंध बनाए रख सकता है, यूरोप के साथ व्यापार और तकनीक में साझेदारी बढ़ा सकता है और चीन के साथ एक तरफ प्रतिस्पर्धा तो दूसरी तरफ बातचीत भी जारी रख सकता है. इसी तरह भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने और पड़ोसी देशों के साथ संबंध बेहतर करने पर भी जोर दे सकता है.
यानी जयशंकर की बताई सोच में भारत के लिए किसी एक देश के साथ हर मुद्दे पर एक जैसा रुख अपनाना जरूरी नहीं है. अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग साझेदारों के साथ काम करते हुए भारत अपने हितों को आगे बढ़ा सकता है. यही सोच आज भारत की विदेश नीति पर होने वाली बहस में ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ के रूप में अक्सर चर्चा में रहती है.
ये भी पढ़ें- जापान में अमेरिका ने तैनात किया 'विध्वंसक' हथियार, गुस्साए रूस ने दे दी चेतावनी, जानें वजह