सोलर-विंड प्रोजेक्ट्स होंगे सस्ते! GST काउंसिल कर सकती है 5% टैक्स का बड़ा ऐलान, जानें प्लान

भारत के 500 GW क्लीन एनर्जी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सरकार रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को बड़ी टैक्स राहत देने की तैयारी में है. रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी GST काउंसिल बैठक में सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स से जुड़े EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर एक समान 5% GST लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है.

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भारत के 500 GW क्लीन एनर्जी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सरकार रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को बड़ी टैक्स राहत देने की तैयारी में है. रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी GST काउंसिल बैठक में सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स से जुड़े EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर एक समान 5% GST लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है. माना जा रहा है कि इस बदलाव से प्रोजेक्ट की लागत घटने के साथ ग्रीन एनर्जी में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा.

अभी कैसे लगता है GST?

फिलहाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में सोलर मॉड्यूल और विंड टरबाइन जैसे उपकरणों पर 5% GST लगता है, जबकि प्लांट के इरेक्शन और कमीशनिंग से जुड़ी सर्विस पर 18% टैक्स लगाया जाता है. EPC कॉन्ट्रैक्ट में 70% हिस्से को सामान और 30% को सर्विस माना जाता है, जिससे प्रभावी GST दर करीब 8.9% हो जाती है. अब सरकार सर्विस वाले हिस्से की दर को घटाकर 5% करने पर विचार कर सकती है.

EPC कॉन्ट्रैक्ट क्या होता है?

EPC यानी Engineering, Procurement and Construction वह व्यवस्था है, जिसमें एक कॉन्ट्रैक्टर किसी प्रोजेक्ट को डिजाइन करने से लेकर उपकरण खरीदने, निर्माण और उसे चालू करने तक की पूरी जिम्मेदारी संभालता है. रिन्यूएबल एनर्जी के बड़े प्रोजेक्ट्स में इस मॉडल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में पूरे EPC कॉन्ट्रैक्ट पर 5% की समान GST दर लागू होने से टैक्स व्यवस्था काफी सरल हो सकती है.

कंपनियों को मिलेगी इनपुट टैक्स क्रेडिट से राहत

अलग-अलग टैक्स स्लैब की वजह से रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों का इनपुट टैक्स क्रेडिट लंबे समय तक फंसा रहता है. इसे इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की बड़ी समस्या माना जाता है. अगर पूरे EPC कॉन्ट्रैक्ट पर 5% GST लागू होता है तो कंपनियों की अटकी हुई ITC राशि का इस्तेमाल आसान हो सकता है और उनकी वर्किंग कैपिटल में भी सुधार आने की उम्मीद है.

टैक्स विवादों पर भी लग सकता है ब्रेक

रिन्यूएबल EPC प्रोजेक्ट्स पर 18% वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट दर लागू होने या 70:30 कंपोजिट सप्लाई मॉडल को लेकर अलग-अलग व्याख्याओं के कारण टैक्स विवाद सामने आते रहे हैं. एक समान 5% GST दर लागू होने से इस तरह की कानूनी उलझन कम हो सकती है. इससे कंपनियों को टैक्स व्यवस्था में ज्यादा स्पष्टता मिलेगी और प्रोजेक्ट की योजना बनाना आसान होगा.

100 करोड़ के प्रोजेक्ट पर 4-5 करोड़ की बचत संभव

अगर EPC कॉन्ट्रैक्ट पर फ्लैट 5% GST लागू किया जाता है तो प्रोजेक्ट की लागत में प्रत्यक्ष कमी आ सकती है. उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, हर 100 करोड़ रुपये के EPC कॉन्ट्रैक्ट पर करीब 4 से 5 करोड़ रुपये तक की बचत संभव हो सकती है. इसका असर आगे चलकर रिन्यूएबल पावर की उत्पादन लागत और बिजली की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

बिजली टैरिफ कम होने की उम्मीद

प्रोजेक्ट लागत घटने का फायदा बिजली खरीदने वाली कंपनियों और DISCOMs तक पहुंच सकता है. पावर परचेज एग्रीमेंट यानी PPA के तहत रिन्यूएबल बिजली की दरों में करीब 10 से 15 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी आने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि वास्तविक बचत प्रोजेक्ट की संरचना और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगी.

500 GW लक्ष्य को मिल सकता है बड़ा बूस्ट

भारत ने 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स की लागत कम करना इस लक्ष्य को गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है. GST में संभावित बदलाव से सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग, विंड एनर्जी पार्क और ग्रीन हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ने की उम्मीद है.

अब GST काउंसिल के फैसले पर नजर

सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि GST काउंसिल की अक्टूबर में होने वाली बैठक में रिन्यूएबल एनर्जी EPC कॉन्ट्रैक्ट्स के टैक्स स्ट्रक्चर पर चर्चा हो सकती है. अगर 5% की फ्लैट दर को मंजूरी मिलती है तो यह सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के लिए महत्वपूर्ण टैक्स सुधार साबित हो सकता है. इससे न सिर्फ कंपनियों की लागत और नकदी प्रवाह में सुधार होगा, बल्कि देश के क्लीन एनर्जी लक्ष्य को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.