Rajnath Singh On West Asia War: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने पहले जर्मनी दौरे पर हैं, जहां उन्होंने वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति से जुड़े अहम मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया. बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत की संभावित भूमिका पर भी विस्तार से बात की और संकेत दिए कि आने वाले समय में भारत शांति स्थापना में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
पश्चिम एशिया संकट पर भारत का संतुलित रुख
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने हमेशा संतुलित और समझदारी भरी विदेश नीति अपनाई है. उन्होंने साफ कहा कि भारत का लक्ष्य हमेशा शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना रहा है.
उन्होंने कहा, “भारत ने हमेशा शांति की दिशा में प्रयास किए हैं, लेकिन हर चीज का एक सही समय होता है.” उन्होंने आगे जोड़ा कि भविष्य में भारत इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है और पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट में भी सकारात्मक योगदान दे सकता है. रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों से युद्ध समाप्त करने की अपील की है और भारत का रुख लगातार संतुलित बना हुआ है.
वैश्विक स्तर पर भारत की सक्रिय कूटनीति
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सीधे वैश्विक नेताओं से बातचीत की है. उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री ने व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति और डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की, तब भी बातचीत का केंद्र शांति और समाधान ही रहा.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी एक पक्ष के खिलाफ खड़ा नहीं होता, बल्कि संवाद और संतुलन की नीति पर चलता है. इसी वजह से वैश्विक स्तर पर भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ी है और न तो अमेरिका भारत को विरोधी मानता है और न ही ईरान.
कूटनीति के कारण सुरक्षित रहे भारतीय हित
रक्षा मंत्री ने भारत की कूटनीतिक रणनीति की सराहना करते हुए कहा कि इसी संतुलित नीति का परिणाम है कि तनावपूर्ण हालात के बावजूद भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर पाए. उस समय कई अन्य देशों के जहाजों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन भारत की सधी हुई नीति ने अपने हितों की रक्षा सुनिश्चित की.
जर्मनी दौरा और द्विपक्षीय संबंध
राजनाथ सिंह ने बताया कि यह उनका जर्मनी का पहला आधिकारिक दौरा है, जहां वे जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के निमंत्रण पर पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और वर्ष 2026 दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस साल दोनों के कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं, जो भविष्य में और गहराई हासिल करेंगे.
आर्थिक साझेदारी में लगातार बढ़ोतरी
आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले 70 वर्षों में भारत और जर्मनी के बीच हर क्षेत्र में सहयोग मजबूत हुआ है. आज जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है. भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं, जो देश के औद्योगिक विकास और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति दे रही हैं. साथ ही, कई भारतीय कंपनियां भी जर्मनी में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और अधिक गहरे होते जा रहे हैं.
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
अपने पूरे संबोधन में राजनाथ सिंह ने यह स्पष्ट किया कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और प्रभावशाली देश के रूप में उभर रहा है. संतुलित विदेश नीति, सक्रिय कूटनीति और मजबूत आर्थिक साझेदारी के जरिए भारत न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में भी महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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