Bullet Train: सिर्फ 6 घंटे में पूरा होगा दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर! बंगाल को मिलेगी बुलेट ट्रेन की सौगात

पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की घोषणा की है.

Railway Minister Ashwini Vaishnaw Announces Bullet Train Project For West Bengal
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की घोषणा की है. प्रस्तावित परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों को दिल्ली से सिलीगुड़ी तक पहुंचने में केवल छह घंटे का समय लगेगा, जबकि वर्तमान में यही सफर 18 से 20 घंटे में पूरा होता है.

रेल मंत्री ने पश्चिम बंगाल सरकार और रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक के बाद बताया कि राज्य को उसकी पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मिलने जा रही है. यह हाई-स्पीड रेल सेवा दिल्ली को उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों से जोड़ते हुए सिलीगुड़ी तक पहुंचेगी.

यह देश की दूसरी बुलेट ट्रेन परियोजना होगी, जिसे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद विकसित किया जाएगा.

दो चरणों में विकसित होगा कॉरिडोर

प्रस्तावित परियोजना को दो प्रमुख हिस्सों में विकसित करने की योजना है. पहला कॉरिडोर दिल्ली से वाराणसी तक होगा, जबकि दूसरा वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ेगा. अधिकारियों के अनुसार, परियोजना पर निर्माण कार्य 2028 के आसपास शुरू होने की संभावना है.

कई प्रमुख शहरों को मिलेगा फायदा

हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के तहत नई दिल्ली, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, पटना और न्यू जलपाईगुड़ी जैसे महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ा जाएगा. भविष्य में इस नेटवर्क को गुवाहाटी तक विस्तारित करने की संभावना भी जताई गई है.

6 घंटे में पूरा होगा सफर

वर्तमान में दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की रेल यात्रा में लगभग 18 से 20 घंटे लगते हैं. लेकिन प्रस्तावित बुलेट ट्रेन 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते हुए करीब 1500 किलोमीटर का सफर मात्र छह घंटे में पूरा कर सकेगी.

योजना के अनुसार दिल्ली से वाराणसी की दूरी लगभग साढ़े तीन घंटे में तय होगी, जबकि वाराणसी से सिलीगुड़ी तक का सफर तीन घंटे से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा.

निवेश और रणनीतिक महत्व

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश होने का अनुमान है. यह कॉरिडोर उत्तर भारत को पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार सिलीगुड़ी से जोड़ेगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को नई गति मिलने की उम्मीद है.

सिलीगुड़ी क्षेत्र को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर के पास स्थित है.

पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू होने से उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही व्यापारिक गतिविधियों और माल परिवहन की गति भी बढ़ेगी. बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है.

रेलवे परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

रेल मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कई रेलवे परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राज्य में रेल अवसंरचना के विकास के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है और लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा.

इसके अलावा कोलकाता मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और नई पीढ़ी की ट्रेनों को शामिल करने की योजना पर भी काम जारी है.

परियोजना के सामने चुनौतियां

हालांकि इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण में कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां भी होंगी. सबसे बड़ी चुनौती घनी आबादी वाले इलाकों में भूमि अधिग्रहण को माना जा रहा है.

इसके अलावा सिलीगुड़ी के संवेदनशील ‘चिकन नेक’ क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के नजदीक ट्रैक निर्माण, भारी वर्षा और कमजोर भू-संरचना जैसी परिस्थितियां भी परियोजना के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनौतियों का समाधान कर लिया गया तो यह परियोजना उत्तर और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है.

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