PoK में फिर फूटा Gen-Z का गुस्सा, शहबाज सरकार के खिलाफ कर रहे विरोध प्रदर्शन, जानें क्या हैं मांगें?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में एक महीने के भीतर फिर से विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है, और इस बार युवाओं ने इसका नेतृत्व किया है. यह विरोध प्रदर्शन खासकर जनरेशन Z यानी युवा छात्रों द्वारा किया जा रहा है, जो शहबाज सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं.

Protests erupt again in PoK against Shahbaz government as Gen Z hits the streets
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में एक महीने के भीतर फिर से विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है, और इस बार युवाओं ने इसका नेतृत्व किया है. यह विरोध प्रदर्शन खासकर जनरेशन Z यानी युवा छात्रों द्वारा किया जा रहा है, जो शहबाज सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं. यह आंदोलन मुजफ्फराबाद की एक यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ, जहां छात्रों ने बढ़ती फीस और बेहतर सुविधाओं की मांग की. लेकिन इस बार विरोध का दायरा कुछ ज्यादा ही बढ़ गया और स्थिति हिंसा में तब्दील हो गई.

छात्रों ने शुरू किया शांतिपूर्ण आंदोलन

यह आंदोलन शुरू में पूरी तरह से शांतिपूर्ण था, जिसमें छात्रों ने विश्वविद्यालय की फीस वृद्धि और अन्य सुविधाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. छात्रों ने इन मुद्दों को लेकर शहबाज सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में छात्रों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए देखा जा सकता है. वे बढ़ती फीस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और बेहतर शिक्षा सुविधाओं की मांग कर रहे थे.

फायरिंग और हिंसा का तांडव

लेकिन स्थिति तब बिगड़ी जब एक अज्ञात बंदूकधारी ने छात्रों पर गोलीबारी शुरू कर दी. इस हमले में एक छात्र घायल हो गया. इसके बाद छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने गुस्से में आकर सड़कों पर टायर जलाए, आग लगाई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया. एक वीडियो में यह भी देखा गया कि छात्रों ने पुलिस की मौजूदगी में भी भय और अराजकता का सामना किया, जब वे फायरिंग से डरकर इधर-उधर भाग रहे थे.

इंटरमीडिएट के छात्रों की भी हुई एंट्री

यह विरोध केवल विश्वविद्यालय के छात्रों तक ही सीमित नहीं रहा. अब इंटरमीडिएट यानी हाई स्कूल के छात्रों ने भी इस आंदोलन में भाग लिया. इन छात्रों का मुख्य मुद्दा था नया ई-मार्किंग या डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, जिसे पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में लागू किया है. इस प्रणाली के तहत मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर पर छात्रों के परिणामों का मूल्यांकन डिजिटल तरीके से किया जा रहा है.

रिजल्ट्स और फीस के खिलाफ गुस्सा

30 अक्टूबर को जब इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर के परिणाम घोषित किए गए, तो कई छात्रों को कम अंक मिले, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई. खासकर उन छात्रों को गुस्सा आया जिन्होंने जिन विषयों की परीक्षा नहीं दी, उनमें भी उन्हें पास कर दिया गया. मीरपुर शिक्षा बोर्ड ने इस प्रक्रिया की जांच के लिए एक समिति बनाई है, और छात्र अब रीचेकिंग फी माफ करने की मांग कर रहे हैं. एक विषय की रीचेकिंग फीस 1,500 रुपये है, जिससे छात्रों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है.

पहले भी हुआ था भारी विरोध

POK में पिछले महीने हुए विरोध प्रदर्शनों में भारी हिंसा और विरोध प्रदर्शन देखे गए थे. इस दौरान 12 नागरिकों की जानें चली गईं थीं. तब सरकार से 30 मांगें पूरी करने की मांग की गई थी, जिसमें टैक्स में राहत, आटा और बिजली पर सब्सिडी और विकास कार्यों को समय पर पूरा करने जैसी महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे.

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