ईरान में बदला सत्ता संतुलन, बड़े फैसलों पर IRGC का कब्जा; सुप्रीम लीडर को लेकर सस्पेंस

Iran Supreme Leader: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और जंग जैसे हालात के बीच ईरान की सत्ता व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अब देश के बड़े फैसले पहले की तरह सीधे सुप्रीम लीडर नहीं ले रहे, बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कुछ चुनिंदा कमांडर ही अहम फैसले ले रहे हैं.

power changed in Iran IRGC takes control of major decisions Suspense regarding Supreme Leader
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Iran Supreme Leader: अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और जंग जैसे हालात के बीच ईरान की सत्ता व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अब देश के बड़े फैसले पहले की तरह सीधे सुप्रीम लीडर नहीं ले रहे, बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कुछ चुनिंदा कमांडर ही अहम फैसले ले रहे हैं. बताया जा रहा है कि फैसले पहले IRGC के स्तर पर तय होते हैं और बाद में उन्हें सुप्रीम लीडर को सिर्फ जानकारी के तौर पर बताया जाता है.

मुज्तबा खामेनेई की भूमिका सीमित बताई जा रही

रिपोर्ट में कहा गया है कि Mojtaba Khamenei अब केवल औपचारिक भूमिका में नजर आ रहे हैं. उन्हें फैसलों पर अंतिम मुहर लगाने वाला चेहरा माना जा रहा है, लेकिन असल निर्णय कहीं और लिए जा रहे हैं. यानी फैसले लेने की ताकत अब पूरी तरह उनके पास नहीं रही, बल्कि IRGC के शीर्ष कमांडरों के हाथ में चली गई है.

सुप्रीम लीडर बनने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे

मार्च 2026 में मुज्तबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया था. लेकिन इसके बाद से वे सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आए हैं. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि वे एक हमले में घायल हो गए थे, जिसके बाद से उनकी हालत ठीक नहीं है.

हालांकि, इन दावों पर ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. यह पहली बार है जब कोई सुप्रीम लीडर इतने लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आया.

पहले कैसी थी सत्ता की व्यवस्था

ईरान में सुप्रीम लीडर सबसे ताकतवर पद होता है. वही देश के चीफ कमांडर भी होते हैं और सभी बड़े फैसलों का अंतिम अधिकार उनके पास होता है. मुज्तबा से पहले Ali Khamenei इस पद पर थे. उनके समय में सभी बड़े फैसले वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह लेकर किए जाते थे, लेकिन अंतिम निर्णय वही लेते थे. अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं, जहां फैसलों का केंद्र IRGC बनता जा रहा है.

IRGC की बढ़ती ताकत

रिपोर्ट के अनुसार जंग जैसी स्थिति के कारण Islamic Revolutionary Guard Corps ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. अब देश की सुरक्षा, रणनीति और विदेश नीति जैसे बड़े फैसले भी इसी संस्था के दायरे में आते दिख रहे हैं. यह बदलाव ईरान की सत्ता संरचना में एक बड़े परिवर्तन की ओर इशारा करता है.

कौन हैं IRGC के प्रमुख

इस समय IRGC की कमान Ahmad Vahidi के हाथ में है. उन्हें खामेनेई परिवार का करीबी माना जाता है. इसी साल मार्च में उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था. उन्होंने उस अधिकारी की जगह ली, जिनकी एक बैठक के दौरान मौत हो गई थी. वाहीदी का प्रभाव IRGC के भीतर काफी मजबूत माना जाता है.

IRGC क्या है और कितना बड़ा है

Islamic Revolutionary Guard Corps की स्थापना 1979 में की गई थी. इसका मुख्य काम ईरान की इस्लामिक व्यवस्था और सुप्रीम लीडर के पद की सुरक्षा करना है. आज IRGC में करीब 2 लाख सदस्य हैं और यह सिर्फ सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक मामलों में भी प्रभाव रखता है.

ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह दिखाते हैं कि ईरान की सत्ता का संतुलन बदल रहा है. जहां पहले सुप्रीम लीडर के पास अंतिम शक्ति होती थी, वहीं अब IRGC का दबदबा बढ़ता जा रहा है. आने वाले समय में यह बदलाव ईरान की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर डाल सकता है.

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