पटना, न्यूज डेस्क: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) एक के बाद एक रणनीति तैयार कर रहे हैं. ऐसे में अब उन्होंने शराबबंदी के नए सर्वे (Liquor Ban Survey) का आदेश दिया है. घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा. लोगों से जातीय गणना की तर्ज पर फॉर्मा भराया जाएगा. इसी के साथ शराबबंदी को लेकर राय भी ली जाएगी. फिर इसे लेकर जो रिपोर्ट तैयार की जाएगी उसके आधार पर नीतीश सरकार कोई बड़ा फैसला चुनाव से पहले ले सकती हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि शराबबंदी को अपनी बड़ी उपलब्धि गिनाने वाली नीतीश सरकार ये सर्व क्यों करा रही हैं और क्या शराबबंदी कानून वापस लिया जाएगा. चलिए जानते हैं...
सर्वे का क्या है मकसद?
नीतीश सरकार ने अप्रैल 2016 में शराबबंदी कानून लागू किया था. जिसके बाद से ही इसे लेकर बार-बार सवाल उठाए गए है. इसी वजह से इस कानून में कई बार संशोधन भी किए गए. पिछले महीने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नशा मुक्ति दिवस (Drug Free Day) के मौके पर जातिगत गणना की तरह ही घर-घर जाकर शराबबंदी पर सर्वेक्षण किए जाने की घोषणा की थी. सरकार का ये मकद है कि इस सर्वे से ये पता चलेगा कि शराबबंदी के पक्ष में कितने और कितने विपक्ष पर हैं. बिहार के सभी जिलों में करीब 2,500 घरों में सर्वे की योजना है. जो 12 हफ्ते में पूरा किया जाने को कहा गया है.
7 साल में दो बार की गई रिपोर्ट तैयार
बता दें कि शराबबंदी को लेकर नीतीश सरकार ने इन सात साल में दो बार रिपोर्ट तैयार की. इससे पहले 2018 में नीतीश कुमार ने शराबबंदी के बाद पहला सर्वे करवाया था. जिसमें 1 करोड़ 64 लाख लोगों ने शराब छोड़ दी थी. सर्वे के मुताबिक, इन प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने शराब से बचाए पैसे को सब्जी, कपड़े और दूध जैसी जरूरी चीजें पर खर्च किया. इसके बाद दूसरा सर्वे फरवरी 2023 में हुआ, जिसमें 1 करोड़ 82 लाख लोगों ने शराब छोड़ दी थी. इसमें राज्य के सभी 38 जिलों के तीन हजार से ज्यादा गांव शामिल किए गए थे. बता दें कि राज्य में 99% महिलाएं और 92% पुरुष शराबबंदी के पक्ष में है.