मनीला: फिलीपींस की मरीन कॉर्प्स ने शुक्रवार को अपने 75वीं वर्षगांठ समारोह के दौरान भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी का पहला बैच दुनिया के सामने पेश किया. इस मिसाइल की ताकत को देखते हुए, फिलीपींस द्वारा यह कदम उठाना चीन के लिए एक नई चिंता का कारण बन सकता है, खासकर दक्षिण चीन सागर में स्थित स्कारबोरो शोल जैसे विवादित द्वीपों को लेकर. ब्रह्मोस मिसाइल का यह बैच फिलीपींस की नौसेना की क्षमता को मजबूत करेगा और चीन के प्रभाव क्षेत्र में सीधा मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी हथियार साबित हो सकता है.
ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी का खुलासा
फिलीपींस मरीन कॉर्प्स ने जम्बालेस स्थित अपने बेस से पहली ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी का खुलासा किया. इस बैटरी में दो मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर हैं, जिनमें प्रत्येक में दो मिसाइलें रखी जाती हैं. इसके अलावा, तीन सहायक वाहन भी हैं: मोबाइल कमांड पोस्ट (MCP), रखरखाव सहायता वाहन, और ट्रांसपोर्टर-लोडर. यह प्रणाली पूरी तरह से तैनात करने के लिए तैयार है और फिलीपींस के सेना के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित होगी.
⚡️Philippines 🇵🇭 PMC has revealed its first 🇮🇳 BrahMos missile battery located in Zambales, from where missiles can reach Scarborough Shoal.
— Adithya Krishna Menon (@AdithyaKM_) November 7, 2025
Battery composition looks to be:
- Two Mobile Autonomous Launchers with 2 missiles each
- Three support vehicles: Mobile Command Post… https://t.co/qsJLUkNLxx pic.twitter.com/WANcPSiiAN
भारत से हुआ ब्रह्मोस मिसाइल का सौदा
फिलीपींस ने 2022 में भारत के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत उसने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को खरीदने का निर्णय लिया था. इस डील के तहत फिलीपींस को 2024 और 2025 के बीच दो बैच प्राप्त हो चुके हैं, और अब भारत जल्द ही तीसरा बैच भेजेगा. इस मिसाइल की सुपरसोनिक क्रूज क्षमताओं के कारण यह फिलीपींस की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा, खासकर दक्षिण चीन सागर में, जहां चीन और फिलीपींस के बीच लगातार तनाव बना हुआ है.
चीन के साथ तनाव के बीच ब्रह्मोस मिसाइलों का महत्व
फिलीपींस और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर में लंबे समय से विवाद चल रहा है, और फिलीपींस अपने तटों और समुद्री इलाके की रक्षा के लिए सशक्त कदम उठा रहा है. भारत से मिली ब्रह्मोस मिसाइल बैटरियों के माध्यम से फिलीपींस अब अपनी नौसेना की ताकत को बढ़ाने में सक्षम होगा. इस सौदे के तहत फिलीपींस को 37.5 करोड़ डॉलर में भूमि-आधारित ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, बैटरियां, लॉन्चर और अन्य उपकरण प्राप्त होंगे. यह डील फिलीपींस के लिए सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, खासकर यदि वह दक्षिण चीन सागर में अपनी शक्ति को और बढ़ाना चाहता है.
ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत
भारत और रूस द्वारा विकसित ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर तक है, जो इसे एक सटीक और प्रभावी हथियार बनाता है. यह मिसाइल मैक 2 से 3 के बीच की गति से उड़ान भरने की क्षमता रखती है और 200 से 300 किलोग्राम तक के वारहेड ले जा सकती है. इसे विभिन्न प्लेटफार्मों जैसे कि भूमि आधारित तटीय बैटरियों, नौसैनिक जहाजों और हवाई प्रक्षेपण प्रणालियों में एकीकृत किया गया है. इसकी सुपरसोनिक रफ्तार और सटीकता इसे अन्य मिसाइल प्रणालियों से कहीं अधिक खतरनाक बनाती है.
भविष्य में ब्रह्मोस मिसाइलों का विस्तार
फिलीपींस को भारत से ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की प्राप्ति न केवल उसकी सैन्य शक्ति को मजबूत करेगी, बल्कि यह भारत-फिलीपींस संबंधों को भी नई दिशा में ले जाएगा. फिलीपींस के लिए यह मिसाइल एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकती है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ. आने वाले वर्षों में, इस तरह के रक्षा सौदों से न केवल दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे, बल्कि दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन भी प्रभावित होगा.
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