आज है परिवर्तिनी एकादशी, भूलकर भी न करें ये काम, जानें व्रत-पारण का शुभ समय और पूजा विधि

Parivartini Ekadashi 2026: परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन व्रत रखने से सुख-समृद्धि, संतान सुख और मोक्ष की कामना की जाती है, वहीं गणेश उत्सव के बीच पड़ने के कारण गणपति पूजा भी शुभ मानी जाती है.

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Parivartini Ekadashi 2026: परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू हो चुकी है और इसका समापन 22 सितंबर की रात 9 बजकर 43 मिनट पर होगा. एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर की सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक किया जा सकेगा. व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण के समय का विशेष ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है.

पद्मा और जयंती एकादशी भी है दूसरा नाम

परिवर्तिनी एकादशी को पद्मा एकादशी और जयंती एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इसलिए धार्मिक कैलेंडर या किसी पूजा सामग्री में अगर पद्मा एकादशी या जयंती एकादशी का उल्लेख मिले, तो इसे परिवर्तिनी एकादशी के ही नाम के रूप में समझा जाता है.

वामन स्वरूप में भगवान विष्णु की पूजा

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करते हैं और सुख, शांति, समृद्धि तथा जीवन में उन्नति की कामना करते हैं. माना जाता है कि श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है.

गणेश उत्सव के बीच पड़ रही है एकादशी

इस बार परिवर्तिनी एकादशी गणेश उत्सव के दौरान पड़ रही है. ऐसे में भगवान विष्णु के साथ भगवान गणेश की पूजा करना भी शुभ माना जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों देवताओं की आराधना से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने की कामना की जाती है.

संतान सुख और समृद्धि के लिए भी खास

परिवर्तिनी एकादशी को संतान सुख, धन-समृद्धि, विद्या और बुद्धि की कामना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है. भक्त इस दिन अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए भगवान विष्णु का आशीर्वाद मांगते हैं.

मोक्ष की कामना से जुड़ा है व्रत

धार्मिक मान्यताओं में परिवर्तिनी एकादशी के व्रत को पापों के क्षय और मोक्ष की प्राप्ति की कामना से जोड़ा गया है. श्रद्धालु इस दिन संयम रखते हुए भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा और व्रत करते हैं. मान्यता है कि नियम और श्रद्धा के साथ एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है.

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