पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. देश की सरकार ने आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 3.65 फीसदी कर दिया है. पहले इसके 3.70 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था, जबकि शुरुआती लक्ष्य 4 फीसदी रखा गया था. आर्थिक विकास की रफ्तार में आई इस गिरावट से साफ है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई. वहीं, भारत की मजबूत विकास दर के मुकाबले पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति एक बार फिर चर्चा में आ गई है.
उद्योग और सेवा क्षेत्र की सुस्ती ने बढ़ाई मुश्किलें
पाकिस्तान की GDP ग्रोथ में कटौती की मुख्य वजह औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की धीमी रफ्तार बताई गई है. पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की राष्ट्रीय लेखा समिति के संशोधित आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.50 फीसदी रही, जो पहले के 2.89 फीसदी के अनुमान से अधिक है. इसके उलट, उद्योग क्षेत्र की वृद्धि दर 3.51 फीसदी से घटकर 3.34 फीसदी और सेवा क्षेत्र की दर 4.09 फीसदी से कम होकर 3.81 फीसदी रह गई. यानी कृषि में सुधार के बावजूद उद्योग और सेवा क्षेत्र की कमजोरी ने कुल आर्थिक विकास को प्रभावित किया.
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार का असर आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है. पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,896 डॉलर पहुंच गई है, जो पिछले वित्त वर्ष के 1,824 डॉलर से अधिक है. हालांकि, केवल प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी से लोगों की वास्तविक आर्थिक स्थिति में सुधार होना जरूरी नहीं है. महंगाई, रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ता खर्च और सीमित बचत जैसी चुनौतियां परिवारों की आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल सकती हैं. ऐसे में रोजगार के अवसर बढ़ाना, उद्योगों में निवेश आकर्षित करना और घरेलू मांग को मजबूत करना पाकिस्तान के लिए अहम चुनौती बनी हुई है.
भारत की GDP ग्रोथ के मुकाबले कहां खड़ा है पाकिस्तान?
भारत और पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर की तुलना करें तो दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है. संबंधित रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ 7.7 फीसदी रही, जबकि पाकिस्तान की विकास दर 3.65 फीसदी पर सिमट गई. इस हिसाब से भारत की आर्थिक वृद्धि दर पाकिस्तान से 4.05 प्रतिशत अंक अधिक रही. पाकिस्तान के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक विकास को गति देना, औद्योगिक उत्पादन बढ़ाना और सेवा क्षेत्र की रफ्तार सुधारना है. आने वाले समय में इन क्षेत्रों का प्रदर्शन ही तय करेगा कि देश अपनी आर्थिक चुनौतियों से कितनी मजबूती से उबर पाता है.
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