नई दिल्ली: भारत के चर्चित भाला फेंक खिलाड़ी और टोक्यो ओलंपिक 2020 के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा को बुधवार को भारतीय सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का पद प्रदान किया गया. इस महत्वपूर्ण अवसर पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की उपस्थिति रही. यह सम्मान नीरज की एथलेटिक्स में असाधारण उपलब्धियों और देश के लाखों युवाओं को प्रेरित करने वाले उनके योगदान के लिए दिया गया है. नीरज उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्हें देश के लिए विशेष उपलब्धि हासिल करने के कारण भारतीय सशस्त्र बलों में मानद पद प्रदान किया गया है.
नीरज चोपड़ा का सेना में सफर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नीरज की यह नियुक्ति 16 अप्रैल से प्रभावी मानी गई है. नीरज चोपड़ा 26 अगस्त 2016 को भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर शामिल हुए थे, जहां उन्होंने जूनियर कमीशंड ऑफिसर के तौर पर अपनी सेवाएं दीं. भारतीय सेना में उनकी भूमिका के साथ-साथ खेल के मैदान पर भी उनका प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है. 2018 में नीरज को उनकी खेल प्रतिभा के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो भारत का एक प्रमुख खेल सम्मान है. इसके बाद 2021 में उन्हें खेल रत्न पुरस्कार मिला, जो देश का सर्वोच्च खेल सम्मान माना जाता है.
टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक जीत
नीरज चोपड़ा की सबसे बड़ी उपलब्धि टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत के लिए भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतना है. उन्होंने 87.58 मीटर की दूरी तक भाला फेंका, जो ओलंपिक रिकॉर्ड से भी कुछ कदम पीछे था, और यह भारत के लिए एथलेटिक्स में पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक था. इस जीत ने पूरे देश में उत्साह की लहर दौड़ा दी थी और नीरज को खेल प्रेमियों के साथ-साथ राष्ट्रीय हीरो के रूप में स्थापित कर दिया था.
इस बड़ी सफलता के बाद, भारतीय सेना ने भी नीरज को 2021 में सूबेदार के पद पर पदोन्नत किया. इसके बाद नीरज को 2022 में भारतीय सेना द्वारा 'परम विशिष्ट सेवा मेडल' से सम्मानित किया गया, जो उत्कृष्ट सेवा और देश के लिए समर्पण के लिए दिया जाता है.
नीरज चोपड़ा का प्रेरणादायक सफर
नीरज चोपड़ा की कहानी भारत के उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो कठिन परिश्रम, समर्पण और निरंतर प्रयास से अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं. हरियाणा के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है. सेना में उनके सम्मान और पदोन्नति ने यह संदेश दिया है कि खेल और सेवा दोनों क्षेत्र में उत्कृष्टता को समान महत्व दिया जाता है.
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