नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल ने एक बार फिर भारत के खिलाफ विवादित कदम उठाया है. नेपाल राष्ट्र बैंक ने गुरुवार को एक नया सौ रुपये का नोट जारी किया, जिसमें नेपाल का नया विवादास्पद मानचित्र छापा गया है. इस नोट पर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे भारतीय क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें भारत अपना हिस्सा मानता है. इस कदम पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे “कृत्रिम विस्तार” करार दिया है.
नेपाल के नए नोट पर विवादित मानचित्र
नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा जारी किए गए इस नए सौ रुपये के नोट में नेपाल के मानचित्र के साथ-साथ वह विवादास्पद क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें भारत ने अपना हिस्सा माना है. भारत का कहना है कि नेपाल का यह कदम भ्रामक और गलत है, और इसका किसी भी तरह का वास्तविक प्रभाव नहीं होगा. भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे एकतरफा कदम बताते हुए इस पर आपत्ति जताई है.
नेपाल का दावा, भारत की आपत्ति
नेपाल ने पहले 2020 में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने नए मानचित्र में शामिल करते हुए संसद से मंजूरी ली थी, और अब उसे नए नोट पर भी प्रदर्शित किया गया है. भारत ने इस कदम को “कृत्रिम रूप से दावे बढ़ाना” बताया और साफ किया कि वह नेपाल के इस एकतरफा कदम को स्वीकार नहीं करेगा. भारत का कहना है कि इस कदम से जमीन पर कुछ भी नहीं बदलता है, और नेपाल के इस दावे को वह ऐतिहासिक तथ्यों से बाहर मानते हैं.
नेपाल के बैंक का स्पष्टीकरण
नेपाल राष्ट्र बैंक ने इस नोट के जारी करने को लेकर स्पष्टीकरण दिया है कि यह नया नक्शा पहले से ही पुराने नोटों पर था, और अब इसे सरकार के निर्णय के अनुसार अपडेट किया गया है. बैंक का कहना है कि यह नक्शा केवल सौ रुपये के नोट पर है, जबकि अन्य मूल्यवर्ग के नोटों पर नेपाल का मानचित्र नहीं है. इस नोट पर लुम्बिनी का अशोक स्तंभ और गैंडे की तस्वीर भी है, साथ ही इसे दृष्टिबाधित लोगों के लिए भी सुरक्षित किया गया है.
भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद
भारत और नेपाल के बीच लगातार सीमा विवाद बना हुआ है, खासकर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर. 2020 में भारत ने नेपाल के संशोधित मानचित्र को "एकतरफा कार्रवाई" करार दिया था, और अब नेपाल द्वारा किए गए इस कदम को भी उसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है. भारत ने साफ किया है कि वह नेपाल के इस कदम को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा.
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत ने नेपाल के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह एकतरफा निर्णय है और इससे किसी भी प्रकार की वास्तविकता नहीं बदलने वाली है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस विवाद में बातचीत जारी है और भारत ने नेपाल को पहले ही चेतावनी दी थी कि इस तरह के कदमों को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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