Neem Karoli Baba Miracles: भारत के संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की कहानियां देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहीं. ऐसी ही एक कहानी नीम करोली बाबा और अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्बर्ट की है. एक समय हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े रिचर्ड अल्बर्ट की जिंदगी में भारत की यात्रा के बाद ऐसा मोड़ आया, जिसने उनकी पूरी आध्यात्मिक दिशा बदल दी. आगे चलकर यही रिचर्ड अल्बर्ट राम दास के नाम से दुनिया में पहचाने गए.
राम दास के आधिकारिक संस्मरणों और उनके बारे में प्रकाशित सामग्री के मुताबिक, वह 1967 में भारत आए थे और इसी यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई. बाद में उन्होंने योग, ध्यान और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को पश्चिमी दुनिया तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई.
हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक से आध्यात्मिक खोज तक
रिचर्ड अल्बर्ट हार्वर्ड में मनोविज्ञान के प्रोफेसर थे और चेतना तथा साइकेडेलिक पदार्थों पर शोध के लिए जाने जाते थे. वह टिमोथी लीरी समेत अन्य शोधकर्ताओं के साथ LSD और दूसरे साइकेडेलिक पदार्थों पर प्रयोगों से जुड़े रहे. उनके इस शोध को लेकर काफी विवाद भी हुआ और 1963 में अल्बर्ट तथा लीरी को हार्वर्ड से अलग कर दिया गया. इसके बाद रिचर्ड अल्बर्ट की तलाश सिर्फ अकादमिक शोध तक सीमित नहीं रही. 1967 में वह भारत पहुंचे और यहां उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा यानी महाराजजी से हुई. राम दास की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, यही मुलाकात उनके जीवन में निर्णायक मोड़ साबित हुई.
कैंची धाम में हुई नीम करोली बाबा से मुलाकात
भारत में रिचर्ड अल्बर्ट की मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई, जिनसे वह आगे चलकर अपने गुरु के रूप में जुड़े. राम दास के संस्मरणों में इस मुलाकात को बेहद प्रभावशाली बताया गया है. उनके अनुसार, बाबा ने उनसे ऐसी निजी बातों का जिक्र किया, जिन्हें लेकर वह खुद भीतर से हैरान थे. राम दास के आधिकारिक लेखों में नीम करोली बाबा से मुलाकात के बाद उनके जीवन में आए आध्यात्मिक बदलाव का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसी दौर में रिचर्ड अल्बर्ट ने योग और ध्यान का अभ्यास शुरू किया और भारत में कई महीने बिताए.
जब नीम करोली बाबा ने मांगी LSD की 'दवा'
रिचर्ड अल्बर्ट और नीम करोली बाबा से जुड़ा सबसे चर्चित प्रसंग LSD से संबंधित है. राम दास ने खुद इस घटना को याद करते हुए बताया था कि 1967 में भारत आने के दौरान उनके पास LSD की गोलियां थीं. वह चाहते थे कि कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो इन पदार्थों के अनुभव को उनसे बेहतर समझता हो. राम दास के अनुसार, जब वह महाराजजी के सामने पहुंचे तो बाबा ने उनसे अचानक पूछा कि उनके पास 'दवा' है या नहीं. उनके साथी ने संकेत दिया कि शायद बाबा LSD के बारे में पूछ रहे हैं. इसके बाद रिचर्ड अल्बर्ट अपनी गोलियां लेकर आए और उन्होंने बाबा को LSD दी.
राम दास के मुताबिक बाबा पर नहीं हुआ असर
राम दास के अपने विवरण के अनुसार, नीम करोली बाबा ने LSD लेने के बाद भी सामान्य अवस्था में बातचीत जारी रखी और उन पर वैसा प्रभाव दिखाई नहीं दिया, जिसकी रिचर्ड अल्बर्ट उम्मीद कर रहे थे. राम दास ने बाद में इस अनुभव को अपनी आध्यात्मिक यात्रा के महत्वपूर्ण प्रसंगों में शामिल किया. राम दास की वेबसाइट पर उपलब्ध एक दस्तावेज में भी इस प्रसंग का उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि महाराजजी ने बड़ी मात्रा में LSD लेने के बावजूद सामान्य अवस्था बनाए रखी. यह विवरण राम दास के संस्मरण का हिस्सा है, इसलिए इसे उनके व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव और व्याख्या के रूप में देखना चाहिए.
रिचर्ड अल्बर्ट से कैसे बने राम दास?
नीम करोली बाबा के साथ जुड़ने के बाद रिचर्ड अल्बर्ट की जिंदगी का रास्ता तेजी से बदलने लगा. राम दास की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, बाबा ने उन्हें 'राम दास' नाम दिया, जिसका अर्थ 'ईश्वर का सेवक' बताया जाता है. इसके बाद उन्होंने योग, ध्यान, भक्ति और सेवा को अपने जीवन का प्रमुख हिस्सा बनाया.
1967-68 में भारत में बिताए समय के बाद वह पश्चिम लौटे तो उनकी पहचान अब सिर्फ रिचर्ड अल्बर्ट की नहीं थी. वह राम दास के रूप में आध्यात्मिक शिक्षक और भारतीय दर्शन को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाने वाली प्रमुख आवाज बन चुके थे.
'Be Here Now' ने पहुंचाई भारतीय आध्यात्मिकता पश्चिम तक
राम दास की सबसे चर्चित किताब ‘Be Here Now’ 1971 में प्रकाशित हुई. इस किताब में योग, ध्यान, आध्यात्मिक खोज और भारत में उनके अनुभवों को केंद्र में रखा गया था. राम दास की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, यह किताब बाद में पश्चिमी दुनिया में एक प्रभावशाली आध्यात्मिक कृति बन गई और इसकी 20 लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं. इस तरह हार्वर्ड के मनोविज्ञान प्रोफेसर रिचर्ड अल्बर्ट से राम दास तक का सफर सिर्फ एक व्यक्ति के नाम बदलने की कहानी नहीं रहा. यह उस दौर की कहानी भी है, जब भारतीय योग, ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं में पश्चिमी दुनिया की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही थी और राम दास ने इस संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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