नवरात्रि का पर्व भारतवर्ष में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. हर दिन देवी के विशेष स्वरूप को समर्पित होता है और उनके प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं. मगर ध्यान देने वाली बात यह है कि माता को अर्पित किए जाने वाले भोग की शुद्धता और उपयुक्तता अत्यंत आवश्यक होती है. कई बार जानकारी के अभाव में हम कुछ ऐसे फल या सामग्री चढ़ा देते हैं, जो वर्जित मानी गई हैं और इससे पूजा का पुण्य कम हो सकता है.
नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा को अर्पित किया जाने वाला भोग पूर्णतः सात्विक और शुद्ध होना चाहिए. यदि आप व्रत नहीं भी रखते हैं, तो भी घर में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का त्याग आवश्यक है. भोजन बनाते समय पवित्रता का विशेष ध्यान रखें और रात के समय भोजन करने से पहले माँ को भोग लगाना न भूलें. हर दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप को उनका प्रिय भोग अर्पित करें, ताकि उनकी कृपा प्राप्त हो सके.
माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके प्रिय भोग
भूलकर भी न चढ़ाएं ये फल
नवरात्रि में देवी माँ को कुछ विशेष फलों का भोग नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इन्हें अपवित्र या वर्जित माना गया है. निम्नलिखित फलों से बचें. नींबू, इमली, सूखा नारियल (जो लंबे समय से रखा हो), नाशपाती, अंजीर, इसके अतिरिक्त, कोई भी फल सड़ा-गला, जूठा या अस्वच्छ नहीं होना चाहिए. यह पूजा की शुद्धता को भंग करता है.
ये फल करें अर्पित
माँ को प्रसन्न करने के लिए आप निम्नलिखित फल भोग में शामिल कर सकते हैं. अनार, बेल फल, आम, शरीफा, सिंघाड़ा, ताजे जटा वाले नारियल, इन फलों को भोग में शामिल कर माँ की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. भारत 24 एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है.)
यह भी पढ़ें: शारदीय, चैत्र और गुप्त नवरात्रि में क्या है अंतर? जानिए इन तीनों नवरात्रों का महत्व और विशेषताएं