Gujarat ATS Arrest: गुजरात ATS ने बताया कि गिरफ्तार आतंकियों में अहमद मोहिउद्दीन सैयद (35 वर्ष) के अलावा मोहम्मद सुहेल और आज़ाद सैफी शामिल हैं. इन सभी पर पिछले एक साल से निगरानी रखी जा रही थी. दो दिन पहले, अहमद को अडालज टोल प्लाजा के पास गिरफ्तार किया गया. उसके पास से हथियारों के साथ-साथ एक संदिग्ध रासायनिक लिक्विड बरामद हुआ, जिसे आगे की जांच में ‘रिसिन’ पाया गया. रिसिन एक अत्यंत जहरीला पदार्थ है, जो सायनाइड से भी ज्यादा घातक हो सकता है.
ATS के DIG सुनील जोशी ने बताया कि अहमद ने MBBS की पढ़ाई चीन से की थी और भारत लौटने के बाद वह ऑनलाइन कट्टरपंथी समूहों से जुड़ गया. जांच में सामने आया कि अहमद विदेशी ISKP हैंडलरों के संपर्क में था और उसे भारत में केमिकल वारफेयर अटैक करने का जिम्मा सौंपा गया था.
Ahmedabad, Gujarat | Gujarat ATS arrested Dr Ahmed Mohiuddin Syed s/o Abdul Khadar Jeelani, Mohd Suhel s/o Mohd Suleman, Azad s/o Suleman Saifi.
— ANI (@ANI) November 9, 2025
They had been on the Gujarat ATS's radar for the past year. All three were arrested while supplying weapons. They were planning to… pic.twitter.com/mWhVKaf74T
रिसिन से बड़े हमले की योजना
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी इस खतरनाक ‘रिसिन’ लिक्विड को तैयार करने की प्रक्रिया सीख रहे थे. रिसिन एक ऐसा पदार्थ है जो इंसान के शरीर के संपर्क में आते ही जानलेवा असर डाल सकता है. ATS का कहना है कि अहमद ने अपने मेडिकल बैकग्राउंड का इस्तेमाल इस जहरीले पदार्थ को बनाने में किया.
इसके अलावा प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी राजस्थान के हनुमानगढ़ से हथियार मंगवा रहे थे. अहमद ने पूछताछ में बताया कि वह इन हथियारों को गुजरात में एक संपर्क को देने वाला था और फिर हैदराबाद लौटने की योजना बना रहा था. ATS इस नेटवर्क की पड़ताल कर रही है कि हथियार किन रास्तों और नेटवर्क के जरिए भारत में दाखिल हुए.
समय रहते बचाई गई जानें
गुजरात ATS और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई के तहत यह ऑपरेशन अंजाम दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि आतंकियों को लगभग एक साल से ट्रैक किया जा रहा था. जांच में सामने आया कि अहमदाबाद, लखनऊ और दिल्ली में इनके ग्राउंड रेकी की जा चुकी थी और बड़े पैमाने पर हमले की योजना तैयार थी. अगर समय पर इन्हें पकड़ा नहीं जाता, तो यह भारत के लिए एक बड़ी आपदा बन सकती थी.
अंतरराष्ट्रीय कड़ी और मेडिकल विंग
अब इस मामले में NIA, IB और RAW समेत कई केंद्रीय एजेंसियां जुड़ी हुई हैं और मॉड्यूल की अंतरराष्ट्रीय कड़ी की पड़ताल कर रही हैं. शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, यह मॉड्यूल भारत में ISKP का मेडिकल विंग बनाने की कोशिश कर रहा था. इसका मकसद था डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों को जिहादी मिशन के लिए भर्ती करना और उन्हें हथियारबंद हमले के लिए प्रशिक्षित करना.
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मॉड्यूल सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जो कई देशों में सक्रिय रहते हैं. ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई करना और नेटवर्क को पूरी तरह भंग करना बेहद जरूरी होता है.
एजेंसियों की सतर्कता की अहमियत
यह मामले यह दिखाता है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां लगातार खतरनाक आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखती हैं. चिकित्सकीय पृष्ठभूमि वाले आतंकियों की पहचान और उन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि वे अपने ज्ञान का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं. इस केस में ATS और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता ने बड़ी तबाही को टालने में मदद की.
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