MP News: त्योहारों के मौसम में दूध और उससे बने उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि दूसरे राज्यों में प्रतिबंध के बाद एनालॉग पनीर की बड़ी खेप मध्य प्रदेश में खपाए जाने की आशंका है. इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को इसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि सरकार लोगों की सेहत के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन पर भी रोक रहेगी और इसकी बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
त्योहारों से पहले बढ़ी पनीर की मांग
त्योहारों के दौरान दूध, मावा, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे में मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों की बिक्री रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि रक्षाबंधन समेत आने वाले त्योहारों को देखते हुए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिले. उन्होंने बताया कि 20 जुलाई से प्रदेश में लगातार अभियान चलाकर दूध और मावा की गुणवत्ता की जांच की जा रही है.
दूसरे राज्यों में प्रतिबंध के बाद MP में खपाने की आशंका
स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश के आसपास के कई राज्यों में एनालॉग पनीर को प्रतिबंधित किया जा चुका है. ऐसे में आशंका है कि वहां से एनालॉग पनीर की बड़ी मात्रा मध्य प्रदेश में भेजी जा सकती है. इसी संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने इसके उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. इससे पहले महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी सामने आई है.
ग्राहक को नहीं पता चलता असली और एनालॉग पनीर का फर्क
सरकार के सामने एक बड़ी चिंता यह भी है कि आम ग्राहक के लिए सामान्य पनीर और एनालॉग पनीर में अंतर पहचानना आसान नहीं होता. मंत्री ने कहा कि नियमों के मुताबिक एनालॉग पनीर को उसी नाम और जानकारी के साथ बेचा जाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर इसे ग्राहकों को जानकारी दिए बिना सामान्य पनीर के तौर पर बेचने की शिकायतें सामने आई हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन कर एनालॉग पनीर तैयार करने और बेचने की शिकायतें सरकार के सामने आ रही हैं.
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर दिखने में सामान्य पनीर जैसा ही नजर आ सकता है, लेकिन इसे पारंपरिक पनीर की तरह केवल दूध से तैयार नहीं किया जाता. इसे बनाने में दूध के साथ या उसकी जगह वनस्पति वसा, तेल, दूध प्रोटीन और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसकी उत्पादन लागत सामान्य दूध से बने पनीर की तुलना में कम हो सकती है. इसी वजह से खाद्य कारोबार में इसके इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई जाती रही है. होटल, रेस्तरां और खानपान से जुड़े कारोबार में पिज्जा, बर्गर, सैंडविच और दूसरे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में इसके इस्तेमाल की संभावना रहती है.
सेहत से समझौता नहीं
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के साथ नकली और घटिया उत्पादों की आशंका भी बढ़ जाती है. ऐसे में सरकार जांच और कार्रवाई के जरिए बाजार में शुद्ध खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है.
एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है. अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि प्रतिबंध के बाद इसके उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर प्रभावी तरीके से निगरानी रखी जाए.