नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई के सामने कथित रूप से जूता निकालने की कोशिश की. यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट के एक कोर्टरूम में सामने आया, जहां वह वकील मुख्य न्यायाधीश के काफी करीब पहुंच गया और "सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान" का नारा लगाते हुए हंगामा किया.
यह घटना सुरक्षा व्यवस्था और न्यायपालिका की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, वकील न्यायमूर्ति गवई की भगवान विष्णु पर की गई एक पूर्व टिप्पणी से नाराज़ था, जो सितंबर में एक मामले की सुनवाई के दौरान दी गई थी.
क्या थी टिप्पणी जिससे हुआ विवाद?
सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की एक सात फुट ऊंची मूर्ति को पुनः स्थापित करने की याचिका पर सुनवाई हो रही थी. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा था, "यह याचिका केवल प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई लगती है. अगर आप वास्तव में भगवान विष्णु में आस्था रखते हैं, तो उनसे स्वयं प्रार्थना करें और कुछ ध्यान लगाएं."
इस बयान को सोशल मीडिया पर हिंदू आस्था का मजाक करार देते हुए आलोचना की गई. कई यूज़र्स और संगठनों ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया और CJI के खिलाफ महाभियोग की मांग तक उठा दी गई. इसके बाद CJI गवई ने एक सार्वजनिक स्पष्टीकरण में कहा था कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था.
कोर्ट में हंगामे की घटना
6 अक्टूबर को जब एक नियमित सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश कोर्ट में बैठे थे, तभी एक वकील, जो पहले से कोर्ट में मौजूद था, अचानक हंगामा करने लगा. वह सीधे CJI के पास पहुंच गया और वहां जूता निकालने की कोशिश करने लगा. साथ ही, उसने "सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान" जैसे नारे भी लगाए.
घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मी हरकत में आए और संबंधित वकील को कोर्टरूम से बाहर ले जाया गया. सुप्रीम कोर्ट प्रशासन इस पूरी घटना की जांच कर रहा है और यह देखा जा रहा है कि सुरक्षा में चूक कहां हुई.
सुप्रीम कोर्ट का रुख
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों ने अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, अदालत इस व्यवहार को न्यायपालिका की गरिमा पर हमला मान रही है. इस मामले में उस वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी संभावना जताई जा रही है.
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी कोई अप्रिय घटना न हो.
खजुराहो मंदिर विवाद की पृष्ठभूमि
जिस मामले ने इस विवाद को जन्म दिया, वह मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर परिसर में स्थित जावरी मंदिर से जुड़ा था. यह मंदिर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित स्थलों में शामिल है. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि मंदिर में स्थित भगवान विष्णु की मूर्ति, जिसे हटाकर किसी संग्रहालय में रख दिया गया था, उसे वापस मंदिर में स्थापित किया जाए.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह मामला केवल लोकप्रियता प्राप्त करने की कोशिश लगता है और न्यायपालिका को ऐसे मामलों में नहीं उलझाया जाना चाहिए. इस टिप्पणी ने धार्मिक भावनाओं को प्रभावित किया और यही नाराजगी अब अदालत के अंदर हंगामे के रूप में सामने आई.
ये भी पढ़ें- MIG-21, Su-30MKI, Su-57... रूस ने HAL को दिया बड़ा ऑफर, भारत में नए फाइटर जेट बनाने की हो रही तैयारी