ख्वाइश शर्मा ने KIUG 2025 में 50 मीटर राइफल में जीता रजत पदक, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का बढ़ाया गौरव

KIUG 2025: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की प्रतिभाशाली राष्ट्रीय राइफल शूटर ख्वाइश शर्मा ने एक बार फिर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाते हुए खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (KIUG) 2025) में 50 मीटर राइफल स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया.

Khawish Sharma won silver medal in 50 meter rifle in KIUG 2025 Lovely Professional University
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KIUG 2025: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की प्रतिभाशाली राष्ट्रीय राइफल शूटर ख्वाइश शर्मा ने एक बार फिर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाते हुए खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (KIUG) 2025) में 50 मीटर राइफल स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया. यह प्रतियोगिता जयपुर की विश्व-स्तरीय ओएसिस शूटिंग रेंज में आयोजित हुई, जहाँ देशभर के सर्वश्रेष्ठ युवा निशानेबाज़ अपनी उत्कृष्ट तकनीक, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता का प्रदर्शन करने एकत्र हुए थे. पूरे आयोजन का माहौल रोमांच और प्रतिस्पर्धा से भरा हुआ था, और खिलाड़ियों ने बेहतरीन कौशल का प्रदर्शन किया.

राजस्थान के फतेहपुर शेखावाटी से आने वाली ख्वाइश अपने कड़े अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण के लिए पहचानी जाती हैं. पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने आश्चर्यजनक स्थिरता और संतुलन बनाए रखा. नियंत्रित श्वास, दबाव में भी शांत रहने की क्षमता और प्रत्येक शॉट को सटीकता से अंजाम देने ने उन्हें शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अलग पहचान दिलाई. उनका यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि वे भारत की उभरती हुई निशानेबाज़ी प्रतिभाओं में अग्रणी हैं.

पदक जीतने के बाद ख्वाइश ने अपने परिवार, मित्रों और कोचों का हृदय से आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है. इस उपलब्धि से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आने वाले समय में भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर करने का लक्ष्य रखती हैं. उनका मानना है कि यह साल उनके लिए विशेष उपलब्धियों वाला साबित होगा.

उन्होंने KIUG की भी प्रशंसा की, जो पूरे भारत के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अवसर प्रदान करता है. ख्वाइश के अनुसार, यह आयोजन खिलाड़ियों के विकास, अनुभव और प्रेरणा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों, खेलो इंडिया, RRA और अन्य संगठनों का भी समर्थन के लिए धन्यवाद किया. उनके अनुसार, यह पदक वर्षों की मेहनत, सुबह-सुबह की प्रैक्टिस और अपने कौशल को निखारने की अथक लगन का परिणाम है.

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