JPSC-JSSC Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब महज परीक्षा रद्द कराने या जांच की मांग तक सीमित नहीं रह गया है. रांची में लगातार 17वें दिन जारी प्रदर्शन ने सोमवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया. बैरिकेडिंग के बावजूद प्रदर्शनकारी विधानसभा परिसर के गेट तक पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. घटना के बाद छात्र संगठनों का गुस्सा और बढ़ गया है.
लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान कर दिया है. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया है कि सरकार उनकी शिकायतों को गंभीरता से ले रही है. इसी बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. सरकार की ओर से कुछ परीक्षाएं रद्द करने और ED जांच को मंजूरी देने के बावजूद छात्र CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं. ऐसे में सवाल अब सिर्फ परीक्षा में कथित गड़बड़ी का नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता का भी बन गया है.
विधानसभा घेराव के दौरान कैसे बिगड़े हालात?
JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र सोमवार को बड़ी संख्या में विधानसभा घेराव के लिए पहुंचे थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी, लेकिन कई छात्र बैरिकेड पार कर विधानसभा के गेट तक पहुंच गए. इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया. हालात नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए.
प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई. विधानसभा की कार्यवाही पर भी इसका असर पड़ा. देर शाम अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारी दिनभर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे थे. उनका आरोप है कि शाम होते-होते प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट हुई. हालांकि पुलिस कार्रवाई को लेकर सामने आए इन आरोपों पर आधिकारिक जांच और स्पष्ट निष्कर्ष का इंतजार है.
हेमंत सोरेन ने छात्रों से क्या अपील की?
घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे हैं.
सोरेन ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया. साथ ही उन्होंने आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए छात्रों से किसी के बहकावे में न आने की अपील की. सरकार का रुख साफ है कि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन छात्रों की ओर से अभी आंदोलन खत्म करने के संकेत नहीं मिले हैं.
बीजेपी ने क्यों किया झारखंड बंद का ऐलान?
छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद बीजेपी ने आंदोलन को लेकर सरकार के खिलाफ अपना तेवर और तीखा कर दिया है. 10 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी को हिरासत में लिए जाने के बाद पार्टी ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया. रांची में बीजेपी अध्यक्ष आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया.
बीजेपी नेताओं ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए था. पार्टी ने लोगों से बंद का समर्थन करने की अपील की है. इस घोषणा के साथ ही परीक्षा विवाद अब सीधे राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है.
राहुल गांधी ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
JPSC-JSSC विवाद की गूंज झारखंड से बाहर भी सुनाई देने लगी है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को लेकर सवाल उठाते हुए झारखंड सरकार से मामले का जल्द समाधान निकालने की अपील की. उनके बयान के बाद बीजेपी ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर राजनीतिक सुविधा के हिसाब से छात्रों के मुद्दे उठाने का आरोप लगाया.
वहीं कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार में कांग्रेस की भागीदारी होने के बावजूद पार्टी JPSC-JSSC से जुड़े कथित घोटाले में किसी तरह की संलिप्तता नहीं मानती. उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को दुखद बताया. अंबा प्रसाद ने मामले की CBI जांच की मांग भी दोहराई.
उनका तर्क है कि जब राज्य की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था सरकार के अधीन है, तो सरकार की एजेंसी से जांच कराने को लेकर छात्रों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है. इसी वजह से वह पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच CBI से कराने की मांग कर रही हैं.
सरकार अब तक क्या कदम उठा चुकी है?
छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार पहले ही तीन भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला कर चुकी है. इनमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है. इसके अलावा सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की मांग को भी मंजूरी दी है.
लेकिन छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षाएं रद्द करना या राज्य की एजेंसियों से जांच कराना पर्याप्त नहीं है. वे पूरे मामले की CBI जांच चाहते हैं. छात्रों का आरोप है कि इससे ही भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच और दोषियों की पहचान सुनिश्चित हो सकेगी. यही मांग फिलहाल आंदोलन और सरकार के बीच सबसे बड़े टकराव का कारण बनी हुई है.
पूर्व JPSC चेयरमैन एल खियांग्ते की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
विवाद के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते की CID द्वारा गिरफ्तारी ने मामले को नया मोड़ दिया है. इससे पहले 3 अगस्त को CID ने उनसे करीब सात घंटे पूछताछ की थी. कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी भी की गई थी.
22 जुलाई को CID की कार्रवाई के बाद खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उस समय उन्होंने निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करने के लिए पद छोड़ने की बात कही थी. प्रदर्शनकारी छात्र JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े विवाद में उस एजेंसी की भूमिका की भी जांच और उससे जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, जिस पर पहले अनियमितताओं के कारण कार्रवाई की जा चुकी थी.
खियांग्ते पिछले साल फरवरी में झारखंड लोक सेवा आयोग के चेयरमैन नियुक्त हुए थे. इससे पहले वह राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे. उनके कार्यकाल के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़े फैसलों को लेकर अब जांच एजेंसियां सवालों की पड़ताल कर रही हैं.
TDPL को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
JPSC-JSSC विवाद में TSR Data Processing Limited यानी TDPL का नाम भी लगातार चर्चा में है. आरोप है कि JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए ऐसी कंपनी को काम दिया गया, जिसे JSSC पहले अनियमितताओं के आरोपों के चलते ब्लैकलिस्ट कर चुका था. छात्रों का कहना है कि इस पूरे चयन और परीक्षा संचालन की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.
TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने खियांग्ते पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके मुताबिक, ठेका देने के बदले कथित तौर पर पैसे और कमीशन की मांग की गई थी. हालांकि ये आरोप हैं और जांच एजेंसियों की ओर से इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है. इसलिए इन आरोपों को फिलहाल जांच के दायरे में मौजूद दावों के रूप में ही देखा जा रहा है.
अभय तिवारी का नाम प्रदर्शन में क्यों गूंजा?
छात्र आंदोलन के दौरान अभय तिवारी के पोस्टर भी दिखाई दिए और उनके खिलाफ नारे लगाए गए. जांच एजेंसी के मुताबिक, वह पहले TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुके हैं और बाद में सरकारी सेवा में आए. परीक्षा अनियमितताओं की जांच के दौरान उनका नाम भी सामने आया है.
उन पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित तौर पर पैसे लेकर चयन की गारंटी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी अदालत या जांच एजेंसी की अंतिम पुष्टि के बिना इन्हें तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता. प्रदर्शनकारी छात्रों ने उनके कथित संबंधों और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कुछ लोगों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं.
JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे से भी बढ़ा दबाव
विवाद के बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे ने भी आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवादों के बीच आयोग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए केवल प्रशासनिक फैसले पर्याप्त नहीं होंगे. उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें परीक्षा से लेकर परिणाम तक हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित हो.
सरकार की ओर से रद्द की गई परीक्षाएं, ED जांच और CID की कार्रवाई को एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन छात्र संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनका जोर इस बात पर है कि जांच ऐसी एजेंसी से हो जिस पर किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव न हो.
अब आंदोलन किस दिशा में जाएगा?
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद ने झारखंड में भर्ती प्रक्रिया और सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. एक तरफ सरकार बातचीत और जांच के जरिए समाधान निकालने की बात कर रही है, वहीं छात्र CBI जांच और अपनी अन्य मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. सोमवार की पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और अधिक आक्रामक हो गया है.
बीजेपी के झारखंड बंद के ऐलान ने इस विवाद को राजनीतिक रंग भी दे दिया है. ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत सबसे महत्वपूर्ण होगी. यदि दोनों पक्ष किसी स्वीकार्य समाधान तक पहुंचते हैं तो आंदोलन शांत हो सकता है, लेकिन मांगों पर गतिरोध बना रहा तो प्रदर्शन का दायरा और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल झारखंड की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार छात्रों की CBI जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन को खत्म करने के लिए अगला कदम क्या उठाया जाता है.
ये भी पढ़ें- Aaj Ka Rashifal: मिथुन-सिंह को होगा लाभ, गजकेसरी योग से चमकेगा भाग्य, जानें मेष से मीन तक का हाल