पिछले शुक्रवार को इटली में फिलिस्तीन के समर्थन में एक ऐतिहासिक जनआंदोलन देखने को मिला, जब देश के सैकड़ों शहरों में हजारों लोगों ने रैलियों, मार्च और हड़तालों के ज़रिए एकजुटता दिखाई. सबसे बड़ी रैली मिलान में आयोजित हुई, जहां करीब एक लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे.
रैली के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने शहर के मुख्य हाईवे को जाम कर दिया और पुलिस पर बोतलें फेंकीं. हालात को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने स्मोक बम का इस्तेमाल किया.
देशभर में एकजुटता, 2 मिलियन लोगों ने लिया भाग
इटली के सबसे बड़े मज़दूर संगठन CGIL के अनुसार, यह विरोध सिर्फ मिलान तक सीमित नहीं रहा. देशभर के 100 से अधिक शहरों में 20 लाख से अधिक लोग एक-दिवसीय आम हड़ताल और मार्च में शामिल हुए. यह विरोध मुख्य रूप से ग्लोबल समुंद्री काफिले (फ्लोटिला) को रोके जाने और उसमें सवार एक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी के खिलाफ किया गया था. साथ ही गाज़ा में लगातार बिगड़ते हालात के खिलाफ भी आवाज़ उठाई गई.
प्रदर्शनकारियों ने सड़कें, स्टेशन और बंदरगाह किए ब्लॉक
इटली के कई प्रमुख शहरों में जनसमर्थन जबरदस्त रहा जेनोआ में करीब 40,000 लोगों ने फेरी टर्मिनल से लेकर शहर के मुख्य केंद्र तक मार्च निकाला..ब्रेसिया में 10,000 प्रदर्शनकारी शामिल हुए.विचेंजा में A4 मोटरवे टोल प्लाज़ा, वेनेशिया की सड़कें, लिवोर्नो और सालर्नो के बंदरगाह प्रदर्शन के केंद्र बने.राजधानी रोम में प्रदर्शनकारी पियाज़ा विटोरियो से लेकर टर्मिनी स्टेशन तक मार्च करते हुए पहुंचे, जिससे ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं. कुछ रूट्स पर ट्रेनों को रद्द तक करना पड़ा और कई सेवाएं करीब 80 मिनट तक लेट रहीं.
नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
CGIL के महासचिव मौरिज़ियो लैंडिनी ने इस हड़ताल को पूरी तरह संवैधानिक अधिकार बताते हुए, सरकार की ओर से उठाए गए सवालों को चुनौती देने की बात कही.वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता एली श्लेन ने हड़ताल में शामिल होकर लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार की रक्षा की अपील की.बारी के मेयर वीटो लेसेसे ने मौके पर सीजफायर और फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता की मांग की. टस्कनी के गवर्नर युजेनियो जियानी ने भी शांति और न्याय को प्राथमिकता देने का आह्वान किया.
सरकार में मतभेद, उप-प्रधानमंत्री ने बताया ‘अवैध’
हालांकि सरकार के भीतर सभी नेता इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में नहीं हैं. उप-प्रधान मंत्री माटेओ साल्विनी ने इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल को अवैध करार देते हुए, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.वहीं, रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसैट्टो ने चेतावनी दी कि “बंदरगाह और रेलवे लाइनें ब्लॉक करने से फिलिस्तीनियों को राहत नहीं मिलेगी” और ऐसे तरीकों से केवल जनता को ही नुकसान होगा.
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