Astra Mk-2: भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई दिशा मिलने जा रही है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत की पहली स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली "अस्त्र" के अपग्रेडेड संस्करण Astra Mk-2 के विकास में एक बड़ा कदम उठाया है. इस नई तकनीक से लैस मिसाइल की मारक क्षमता अब 200 किलोमीटर से भी अधिक होगी, जिससे भारत की वायुसेना को रणनीतिक रूप से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों पर बढ़त मिलेगी.
भारतीय वायुसेना (IAF) ने इस अपग्रेड को देखते हुए 700 से अधिक 'अस्त्र Mk-2' मिसाइलों के लिए प्रारंभिक आदेश की योजना बनाई है. इन मिसाइलों को देश के प्रमुख लड़ाकू विमानों जैसे सुखोई-30 MKI, मिग-29 और स्वदेशी तेजस पर तैनात किया जाएगा.
Astra Mk-2 मिसाइल की खासियत?
बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) की क्षमता
अस्त्र Mk-2 एक BVR (Beyond Visual Range) एयर-टू-एयर मिसाइल है, यानी यह 200 किमी से ज्यादा दूरी पर दुश्मन के विमान को तबाह कर सकती है, वह भी तब जब लक्ष्य आँखों से नहीं दिखता.
इससे भारतीय फाइटर पायलट अब दुश्मन की सीमा में प्रवेश किए बिना ही उनका विमान गिरा सकेंगे.
चीन की PL-15 को टक्कर
यह मिसाइल चीन की PL-15 और पाकिस्तान के पास मौजूद PL-15E मिसाइल का जवाब मानी जा रही है.
जहां PL-15E की रेंज लगभग 145 किमी है, वहीं DRDO की Astra Mk-2 इस सीमा को पार करते हुए 200 किमी तक की मारक क्षमता रखेगी.
डुअल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर से लैस
अस्त्र Mk-2 मिसाइल को ‘डुअल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर’ से लैस किया गया है. इस तकनीक में दो चरणों में शक्ति का संचार होता है:
यह तकनीक अब तक अमेरिका की AIM-120D AMRAAM जैसी आधुनिक मिसाइलों में देखी जाती रही है, और भारत इसे अपनी मिसाइलों में आत्मनिर्भरता के साथ विकसित कर रहा है.
आत्मनिर्भर भारत का मजबूत कदम
अस्त्र Mk-2 मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की जा रही है. इसमें जो अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं, वे भारत को भविष्य में विदेशी हथियारों पर निर्भर रहने से बचाएंगी:
इन सभी तकनीकों का लक्ष्य है भारतीय मिसाइलों को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिहाज़ से भी अभेद्य बनाना, ताकि दुश्मन की किसी भी तरह की जैमिंग या रेडार ब्लाइंडिंग तकनीक काम ना कर सके.
ऑपरेशन सिंदूर में बेहतरीन प्रदर्शन
DRDO और वायुसेना ने मिलकर पहले से मौजूद अस्त्र Mk-1 मिसाइल (रेंज 100 किमी) को ऑपरेशन सिंदूर 2025 जैसे अभ्यासों में परखा था, जिसमें इसने बेहतरीन प्रदर्शन किया. अब Mk-2 वर्जन को और ज़्यादा रेंज और तकनीकी बढ़त के साथ युद्ध में तैनात किया जाएगा.
किन लड़ाकू विमानों में होगी तैनाती?
अस्त्र Mk-2 को भारतीय वायुसेना के उन विमानों में लगाया जाएगा जो दुश्मन के खिलाफ पहले मोर्चे पर खड़े होते हैं:
इन विमानों के पास अब 200 किमी से अधिक दूरी पर दुश्मन को निशाना बनाने की क्षमता होगी, जो भारत को दक्षिण एशिया में एक मजबूत हवाई ताकत बनाती है.
चीन और पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता
चीन की वायुसेना (PLAAF) वर्तमान में PL-15 जैसी मिसाइलों पर निर्भर है, लेकिन भारत की नई मिसाइल उससे कहीं ज़्यादा सटीक और लंबी दूरी की होगी.
पाकिस्तान, जो चीनी हथियारों पर अत्यधिक निर्भर है, Astra Mk-2 जैसी मिसाइल की बराबरी नहीं कर सकता, क्योंकि उसके पास ना तो इतनी रेंज है और ना ही खुद की मिसाइल डेवलपमेंट क्षमता.
इसका मतलब यह है कि भारत की वायुसेना को अब एक "नो एंट्री जोन" मिलता है, जिसमें दुश्मन के विमान 200 किमी के अंदर आते ही खतरे में पड़ जाएंगे.
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