नई दिल्ली: भारत के लिए अमेरिकी बाजार पर बढ़े शुल्क का सीधा असर अब साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका ने हाल ही में भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना करते हुए कई श्रेणियों में टैरिफ को 50% तक कर दिया है. इसका नतीजा यह रहा कि अमेरिका को भारतीय निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है. वैश्विक व्यापार दबावों के बीच भारत अब नए और स्थिर बाजारों की तलाश में है, जिसमें रूस एक प्रमुख विकल्प बनकर उभर रहा है.
भारत और रूस के बीच तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नया आयाम देने के लिए 4 और 5 दिसंबर को नई दिल्ली में इंडिया–रूस बिजनेस फोरम का आयोजन किया जा रहा है. दिलचस्प यह है कि यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय होने जा रही है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तैयारियाँ भी अपने अंतिम चरण में हैं. दोनों देश अगले कुछ वर्षों में आपसी व्यापार का आकार 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षा रखते हैं.
रूसी बाजार में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों को बढ़ावा
बिजनेस फोरम का मुख्य उद्देश्य भारतीय इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों को रूस में अधिक व्यापक पहुंच दिलाना है. रूस की निर्माण, ऊर्जा और औद्योगिक मशीनरी से जुड़े सेक्टरों में भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध हैं. अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच टैरिफ और कस्टम क्लियरेंस से जुड़े मुद्दों को सरल बनाने पर भी चर्चा होगी, ताकि भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में प्रवेश आसान हो सके.
इसके साथ ही रूस द्वारा भारतीय खाद्य उत्पादों- खासकर समुद्री उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड की खरीद बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा. रूसी कंपनियों की ओर से भारतीय दवा उत्पादों और स्वास्थ्य उपकरणों में रुचि बढ़ने की संभावना पहले से ही जताई जा रही है.
डिजिटल सेवाओं और तकनीकी सहयोग पर भी ध्यान
फोरम में डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी साझेदारी को भी विस्तृत रूप से शामिल किया गया है. रूसी उद्योगों को आईटी समाधान, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल पेमेंट सेवाओं में भारतीय कंपनियों की बड़ी भूमिका दिख रही है. इस दिशा में साझेदारी दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
दवा और स्वास्थ्य सेवाओं में रणनीतिक सहयोग
भारत और रूस दवा व स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक व्यापक साझेदारी स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देशों के अधिकारी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि फार्मा सहयोग भविष्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है.
मुख्य प्रस्तावों में शामिल हैं—
यह सहयोग दोनों देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने के साथ ही वैश्विक फार्मा बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में सहायक होगा.
खाद्य उत्पादों में भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर
रूसी बाजार भारतीय खाद्य और कृषि उत्पादों के लिए लगातार मजबूत हो रहा है. वर्तमान में भारतीय स्नैक्स, रेडी-टू-ईट भोजन, दालें और मिठाइयाँ रूस में पहले से अच्छी पकड़ बना चुकी हैं. 2024–25 में भारत ने रूस को मक्खन और डेयरी फैट का निर्यात शुरू किया, जबकि भारतीय अंगूरों की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है.
अब दोनों देशों के बीच पोषक अनाज, पारंपरिक मिठाइयाँ और सी-फूड के निर्यात को बढ़ावा देने पर बातचीत आगे बढ़ रही है. भारतीय झींगे (श्रिम्प) के निर्यात को लेकर चर्चा अंतिम चरण में है, जिससे समुद्री उत्पाद क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है.
अमेरिकी टैरिफ की मार और नए बाजारों की तलाश
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाने के बाद कई भारतीय उद्योगों- खासकर इंजीनियरिंग, स्टील, केमिकल और टेक्सटाइल क्षेत्रों को नुकसान हुआ है. अमेरिका को निर्यात में आई गिरावट ने अब भारतीय सरकार और उद्योग को मजबूर किया है कि वे रूस, यूरेशियन बाजारों और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों में नए विकल्प तलाशें.
रूस के साथ व्यापार बढ़ाने की पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच भुगतान व्यवस्था, परिवहन कॉरिडोर और व्यापारिक प्रोत्साहन योजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है.
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