भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम चर्चा में है. भारत ने लंबे समय से अपने वायुसेना बल को मजबूत करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया है, और अब रूस का 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 भारतीय वायुसेना (IAF) की जरूरतों में शामिल होने के करीब दिखाई दे रहा है. यह विमान भारत और रूस के रक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है.
Su-57: डील और प्रस्ताव
रूस ने भारत को कुल 84 Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स की पेशकश की है. न्यूज-18 के सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग अंतिम चरण में है. डील के अनुसार:
यह योजना भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब MiG-21 और MiG-29 जैसी पुरानी फ्लीट रिटायर हो रही हैं और AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट में देरी हुई है.
भारत में 'Make in India' पहल
Su-57 का निर्माण भारत में HAL के माध्यम से होने से भारत को कई फायदे होंगे:
Su-57: तकनीकी विशेषताएं
Su-57 रूस का 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे रडार से छुपकर मिशन करने और दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके मुख्य फीचर्स में शामिल हैं:
हालांकि इस प्रोजेक्ट को वर्षों की देरी, फंडिंग की चुनौतियों और 2019 में प्रोटोटाइप क्रैश जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा. फिर भी, हाल की टेस्ट उड़ानों और तकनीकी सुधारों ने इसे फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है.
भारतीय वायुसेना के लिए रणनीतिक महत्व
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि उसे न्यूनतम 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है. पुराने MiG-21 विमानों की रिटायरमेंट के बाद यह अंतर और बढ़ गया है. ऐसे में Su-57 को एक “स्टॉपगैप” समाधान के रूप में देखा जा रहा है, ताकि जब तक AMCA प्रोजेक्ट पूरी तरह विकसित नहीं होता, तब तक वायुसेना की ताकत बनी रहे.
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से Su-57 की डील भारत को तात्कालिक ताकत और आधुनिक तकनीकी श्रेष्ठता प्रदान करेगी, लेकिन AMCA जैसे स्वदेशी विकास परियोजनाओं में निवेश जारी रखना भी जरूरी है.
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