दो मोर्चों पर जंग की धमकी! पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत और अफगानिस्तान पर साधा निशाना

पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा तंत्र एक बार फिर उबाल पर है. देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने शनिवार (1 नवंबर, 2025) को बयान दिया कि पाकिस्तान दो मोर्चों भारत और अफगानिस्तान  पर एक साथ युद्ध लड़ने के लिए तैयार है.

India Wants to fight with khwajaa asif remarks
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पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा तंत्र एक बार फिर उबाल पर है. देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने शनिवार (1 नवंबर, 2025) को बयान दिया कि पाकिस्तान दो मोर्चों भारत और अफगानिस्तान  पर एक साथ युद्ध लड़ने के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान के साथ युद्धविराम समझौते पर सहमति जताई थी.

ख्वाजा आसिफ ने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान भारत पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली की नीति यह है कि पाकिस्तान को पूर्वी सीमा (भारत) और पश्चिमी सीमा (अफगानिस्तान) दोनों ओर अस्थिर रखा जाए. उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल में पश्चिमी सीमा पर अफगानिस्तान के साथ हुए संघर्ष और मई में भारत के साथ हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान की झड़पें इस रणनीति का हिस्सा हैं. आसिफ के मुताबिक, “भारत नहीं चाहता कि पाकिस्तान स्थिर और सुरक्षित रहे, इसलिए वह हर मोर्चे पर साजिश रच रहा है.

अफगानिस्तान भारत का प्रॉक्सी बनकर काम कर रहा है

यह कोई पहली बार नहीं जब पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने अफगानिस्तान पर भारत के लिए काम करने का आरोप लगाया हो. उन्होंने पहले भी कहा था कि काबुल की सरकार भारत के इशारों पर पाकिस्तान के खिलाफ प्रॉक्सी युद्ध चला रही है. जियो न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि दिल्ली, अशरफ गनी के शासनकाल से ही पाकिस्तान के खिलाफ छुपा हुआ युद्ध चला रहा है. अब इस बात के प्रमाण भी सामने आ चुके हैं. यदि जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ये सबूत पेश करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की नीति पाकिस्तान को “दो दिशाओं में उलझाने” की है ताकि उसका ध्यान आंतरिक स्थिरता और आर्थिक सुधारों से भटक जाए.

इस्तांबुल में हुआ अफगान-पाक युद्धविराम समझौता

गौरतलब है कि 30 अक्टूबर, 2025 को इस्तांबुल में कतर और तुर्किए की मध्यस्थता में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता हुई थी. दोनों पक्षों ने हिंसा पर विराम लगाते हुए युद्धविराम बनाए रखने पर सहमति जताई थी. यह बैठक इसलिए भी अहम थी क्योंकि अफगान-पाक सीमा पर पिछले महीने भारी झड़पें हुई थीं, जिनमें दोनों देशों के सैनिकों की जानें गई थीं. दिलचस्प बात यह रही कि यह संघर्ष उस समय भड़का जब तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत यात्रा पर थे. 

जिससे इस विवाद के राजनीतिक आयाम और गहरे हो गए. ख्वाजा आसिफ ने उम्मीद जताई कि कतर और तुर्किए की भूमिका से यह शांति समझौता स्थायी रूप ले सकता है. उन्होंने कहा कि हम किसी भी देश से टकराव नहीं चाहते, लेकिन अगर हमारी संप्रभुता पर हमला हुआ, तो पाकिस्तान अपनी रक्षा करने में सक्षम है.

दो मोर्चों पर जंग का बयान, रणनीतिक संदेश या आंतरिक राजनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ख्वाजा आसिफ का यह बयान सिर्फ सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि आंतरिक राजनीतिक दबावों का प्रतिबिंब भी है. पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से गुजर रहा है. ऐसे में “दो मोर्चों पर जंग” जैसा बयान घरेलू समर्थन जुटाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. वहीं, भारत और अफगानिस्तान दोनों इस तरह के बयानों को पाकिस्तान की कूटनीतिक असफलता के रूप में देख सकते हैं.

बदलते भू-राजनीतिक समीकरण

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में हालिया तनाव का असर दक्षिण एशिया की स्थिरता पर भी पड़ सकता है. अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आने के बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, आतंकी गतिविधियाँ और व्यापारिक रुकावटें लगातार बढ़ी हैं. भारत, जो क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अफगानिस्तान में स्थिरता का समर्थक रहा है, अब सावधानीपूर्वक दूरी बनाए हुए है. लेकिन इस्लामाबाद के बयानों से यह साफ है कि वह भारत को अफगान नीति के केंद्र में देखता है.

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