चीन और जापान के बीच ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव ने अचानक भारत के लिए नया व्यापारिक अवसर खोल दिया है. हालात तब बदले जब चीन ने जापान से आने वाले हर तरह के सीफूड- जैसे मछली, झींगा और अन्य समुद्री उत्पाद के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी. इस निर्णय के साथ ही चीन के बाजार में सीफूड सप्लाई संकट की आशंका पैदा हो गई, जिसके बाद चीन की नजर भारत जैसे वैकल्पिक निर्यातक देशों पर टिक गई. इसी संभावित मांग का असर भारतीय शेयर बाजार में साफ दिखा, जहाँ कई सीफूड निर्यात कंपनियों के शेयर तेजी से चढ़ गए.
चीन के प्रतिबंध के ऐलान के बाद भारतीय कंपनी अवंती फीड्स के शेयरों में लगभग 10% तक की उछाल देखी गई, जो पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी वृद्धि थी. इसी तरह कोस्टल को-ऑपरेशन नामक दूसरी कंपनी के शेयर भी करीब 5% बढ़ गए. कोस्टल ने कुछ महीनों पहले यह संकेत दिया था कि वह चीन को निर्यात में बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है, और मौजूदा स्थिति उसके लिए नए अवसर लेकर आई है.
चीन–जापान तनाव की वजह क्या है?
यह पूरा विवाद जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो जापान अपनी सेना भेजकर ताइवान की मदद करेगा. बीजिंग ने इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए इसे उकसाने वाला, गैर-जिम्मेदार और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया. इसके अगले ही दिन विवाद और बढ़ गया जब जापान में चीन के काउंसल जनरल शुए जियान ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की कि ताइवान के मुद्दे में जो भी दखल देगा, “उसकी गर्दन काट देंगे.” इस टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को अत्यधिक बढ़ा दिया. दोनों सरकारों ने एक-दूसरे के राजदूतों को तलब किया और अपने-अपने नागरिकों के लिए यात्रा चेतावनियां जारी कीं.
चीन का कहना है कि जापान अनावश्यक रूप से ताइवान के मामले में कदम रख रहा है और यह हस्तक्षेप न सिर्फ जापान के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरनाक है. चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि जापान औपचारिक रूप से ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र नहीं मानता, लेकिन अमेरिका के साथ मिलकर ताइवान की सुरक्षा के मुद्दों पर चीन के दबाव का विरोध करता है. ताइवान की जापान से दूरी महज 110 किलोमीटर है, और उसके आस-पास का समुद्री मार्ग जापान के व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है.
भारत के सीफूड उद्योग के लिए राहतभरी खबर
चीन द्वारा जापान के सीफूड पर लगाया गया नया प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब भारतीय सीफूड निर्यातकों पर पहले से ही दबाव था. अमेरिका ने भारतीय समुद्री उत्पादों पर लगभग 50% तक का शुल्क लगा दिया था, जिसके बाद अक्टूबर में अमेरिकी बाजार में भारत के सीफूड निर्यात में करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई. ऐसे में चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों में भारतीय सीफूड की मांग बढ़ती दिख रही है, जिससे उद्योग में एक बार फिर उम्मीद जगी है.
पिछले वित्त वर्ष में भारत ने करीब 7.4 बिलियन डॉलर यानी लगभग 61,000 करोड़ रुपये का सीफूड निर्यात किया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा फ्रोजन श्रिम्प और फ्रोजन फिश का था. अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा आयातक है और वॉलमार्ट, क्रोगर जैसी बड़ी रिटेल कंपनियां भारतीय उत्पाद खरीदती हैं. लेकिन चीन के नए कदम से भारतीय निर्यातकों को एक और बड़ा बाजार मिल सकता है.
जापान को बड़ा आर्थिक नुकसान का खतरा
दूसरी तरफ, चीन द्वारा लगाया गया प्रतिबंध जापान के लिए गंभीर झटका है. जापान अपने कुल सीफूड निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा चीन को भेजता है और चीन लंबे समय से जापानी समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार रहा है. हालांकि कुल निर्यात में सीफूड की हिस्सेदारी सिर्फ 1% है, लेकिन चीन जैसा बड़ा बाजार खोना जापानी उद्योग के लिए बड़ा नुकसान है.
दो साल पहले फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के पानी को समुद्र में छोड़े जाने के विवाद के बाद चीन ने जापानी सीफूड पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन हाल ही में जापान को फिर से निर्यात की मंजूरी मिली थी. अब नया प्रतिबंध उन कंपनियों के लिए फिर से मुश्किलें बढ़ा रहा है जिन्होंने दो साल बाद अपने निर्यात अभियान को दोबारा खड़ा किया था.
दोनों देशों में सुरक्षा चेतावनियाँ जारी
तनाव बढ़ने के बाद जापान ने चीन में रह रहे अपने नागरिकों को सावधान रहने की सलाह दी है. जापानी सरकार ने कहा है कि चीनी मीडिया में जापान को लेकर भावनाएँ नकारात्मक हो गई हैं, इसलिए अपने लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहने और सतर्क रहने को कहा गया है. चेतावनी में यह भी कहा गया है कि अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बरतें, अकेले यात्रा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत दूरी बना लें.
उधर चीन ने भी जापान जाने वाले अपने छात्रों और नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की है. चीन का दावा है कि जापान में हाल के महीनों में अपराध बढ़ा है और चीनी नागरिकों के लिए माहौल पहले जितना सुरक्षित नहीं रहा.
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