Gold-Silver Crash: सोने-चांदी के दाम में भारी गिरावट, क्या खत्‍म हो गया तेजी का दौर? जानें सबकुछ

सोने और चांदी की कीमतों में हाल ही में जो गिरावट देखने को मिली, उसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया है.

Heavy fall in the prices of gold and silver is the bullish period over
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Gold-Silver Crash: सोने और चांदी की कीमतों में हाल ही में जो गिरावट देखने को मिली, उसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया है. पिछले कई महीनों से तेजी की रफ्तार पर दौड़ रहे ये धातु अचानक ही बड़े पैमाने पर टूट गईं. एमसीएक्स पर कल तक ₹1,93,096 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा सोना अचानक गिरकर ₹1,67,406 पर पहुँच गया, यानी करीब 13 प्रतिशत की भारी गिरावट. चांदी ने भी इस गिरावट से अछूती नहीं रही, ₹4,20,048 प्रति किलो से गिरकर ₹3,32,002 पर बंद हुई, यानी लगभग 21 प्रतिशत का भारी नुकसान.

इस अचानक आई गिरावट ने निवेशकों में चिंता बढ़ा दी है और एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोने और चांदी का तेजी का दौर अब खत्म हो गया है या यह सिर्फ अल्पकालिक गिरावट है.

गिरावट के पीछे की वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, इस वैश्विक गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी मौद्रिक नीति में बदलाव की आशंका रही. अमेरिकी राष्ट्रपति ने केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का नया प्रमुख नियुक्त किया है. वॉर्श को बाजार में ‘सख्त नीति’ (हॉकिश) अपनाने वाला माना जाता है. इसका अर्थ यह है कि ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है और महंगाई पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.

जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, डॉलर मजबूत होता है और इसके विपरीत सोने और चांदी जैसे मूल्यवान धातुओं की कीमतों पर दबाव आता है. डॉलर इंडेक्स में 0.4 फीसदी की तेजी के साथ 96.60 तक पहुँचने से वैश्विक स्तर पर बिकवाली तेज हो गई और इसने सोना-चांदी की गिरावट को और बढ़ा दिया.

मुनाफावसूली ने बढ़ाई गिरावट

जनवरी के अंत तक चांदी ने 42 प्रतिशत की तेजी दिखाई थी, जो किसी एक महीने में ऐतिहासिक रिकॉर्ड था. वहीं, सोने ने डॉलर के संदर्भ में 15 प्रतिशत की मासिक तेजी दर्ज की, जो 1999 के बाद की सबसे बड़ी थी. विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई एसेट इतनी तेजी से बढ़ता है, तो वह 'ओवरबॉट' स्थिति में चला जाता है. केवल बहाना चाहिए होता है और वॉर्श के नियुक्त होने की खबर ने यह बहाना मुहैया कर दिया. निवेशकों ने उच्च स्तरों पर मुनाफा बुकिंग शुरू कर दी, जिससे सोना-चांदी की कीमतें अचानक गिर गईं.

क्या तेजी का दौर खत्म हो गया?

ज्यादातर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल अल्पकालिक है. PlusCash के सीईओ प्रणव कुमार के अनुसार, “यह लंबी दौड़ के दौरान आने वाला सामान्य ठहराव है. सोने की बुनियादी ताकत अभी भी बरकरार है.”

कुछ मुख्य कारण जो सोने-चांदी की कीमतों को लंबी अवधि में सहारा देते हैं:

  • सेंट्रल बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अभी भी डॉलर के विकल्प के रूप में सोना जमा कर रहे हैं.
  • औद्योगिक मांग: सिल्वर की मांग सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), डेटा सेंटर्स और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है.
  • वैश्विक अनिश्चितता: भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता की स्थिति में सोना और चांदी हमेशा सुरक्षित निवेश मानी जाती हैं.

इन सब कारणों से विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना और चांदी में हाल की गिरावट अल्पकालिक है और आने वाले समय में कीमतों में बहुत अधिक गिरावट की संभावना नहीं है.

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