उत्तराखंड के हल्द्वानी की रेणु धरियाल ने अपनी अनोखी पहचान के दम पर दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया है. उनके बालों की लंबाई 271.50 सेंटीमीटर यानी करीब 8 फीट 10 इंच मापी गई है. इसी उपलब्धि के साथ रेणु ने ‘सबसे लंबे बालों वाली जीवित महिला’ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. उनकी लंबाई इतनी ज्यादा है कि यह इतिहास के सबसे लंबे व्यक्ति रहे रॉबर्ट वाडलो की 272 सेंटीमीटर लंबाई से भी महज कुछ सेंटीमीटर कम है. रेणु ने यूक्रेन की आलिया नासिरोवा का 257.33 सेंटीमीटर लंबे बालों का रिकॉर्ड पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की है.
भारतीय परंपरा से मिली बाल बढ़ाने की प्रेरणा
रेणु के लिए लंबे बाल केवल खूबसूरती का हिस्सा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ी एक भावना भी हैं. उनका कहना है कि भारतीय समाज में सदियों से लंबे और घने बालों को नारी सौंदर्य और प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक माना जाता रहा है. इसी सोच से प्रभावित होकर उन्होंने वर्ष 2015 के बाद अपने बालों को कटवाना पूरी तरह बंद कर दिया. वक्त के साथ उनके बाल इतने लंबे हो गए कि जब वह खुले बालों के साथ चलती हैं तो वे जमीन तक पहुंचते हुए पीछे लहराते हैं. रोजमर्रा के कामों के दौरान उन्हें संभालने के लिए रेणु अक्सर बालों की मोटी और भारी चोटी बना लेती हैं.
घंटों की मेहनत और घरेलू नुस्खों से संभालती हैं बाल
इतने लंबे बालों को खूबसूरत और स्वस्थ बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है. रेणु के मुताबिक बालों को धोने, सुखाने और सुलझाने में कई घंटे लग जाते हैं. हालांकि, वह अपने बालों की देखभाल के लिए महंगे और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स पर निर्भर नहीं रहतीं. कंटेंट क्रिएटर और यूट्यूबर के तौर पर वह सोशल मीडिया पर अपने हेयर केयर रूटीन और घरेलू नुस्खे भी साझा करती हैं. वह घर पर तैयार किए गए केमिकल-फ्री हेयर ऑयल और शैंपू को प्राथमिकता देती हैं और इनके इस्तेमाल से जुड़े तरीके अपनी महिला फॉलोअर्स के साथ शेयर करती हैं. उनके लिए यह हेयर केयर रूटीन अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है.
विश्व रिकॉर्ड के साथ भारत के लिए खास संदेश
रेणु के खुले और असाधारण रूप से लंबे बाल जब लोगों का ध्यान खींचते हैं तो उन्हें सोशल मीडिया पर भी खूब प्रतिक्रिया मिलती है. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना उनके लिए सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने स्थानीय समुदाय और देश को वैश्विक पहचान दिलाने का अवसर भी है. रेणु का मानना है कि अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहते हुए लगातार मेहनत की जाए तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता. हल्द्वानी की इस महिला की कहानी आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो अपनी किसी खास खूबी को पहचानकर उसे अपनी पहचान बनाना चाहते हैं.
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