9 हजार लगाओ, हर महीने कमाओ... गाजियाबाद में लालच देकर 5000 करोड़ डकार गईं कंपनियां, 10 लोगों पर FIR

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से 5000 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि आकर्षक रिटर्न और सस्ते घरेलू सामान का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए गए और बाद में पूरा नेटवर्क अचानक बंद कर दिया गया.

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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से 5000 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले का मामला सामने आया है. आरोप है कि आकर्षक रिटर्न और सस्ते घरेलू सामान का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए गए और बाद में पूरा नेटवर्क अचानक बंद कर दिया गया. कवि नगर थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक वैदिक आयुरक्योर कंपनी और एक्सिस ई-कॉर्पोरेशन से जुड़े 10 लोगों को नामजद किया गया है. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों और निवेशकों से जुटाई गई रकम की जांच में जुट गई है.

रिटर्न और भारी छूट का लालच देकर बनाया भरोसा

शिकायतकर्ता अधिवक्ता महेश कुमार वर्मा के अनुसार कंपनियों ने 9 हजार रुपये की आईडी खरीदने पर हर महीने 1100 रुपये देने और घरेलू सामान पर 33 प्रतिशत तक की छूट का वादा किया था. शुरुआती दौर में निवेशकों को भुगतान भी किया गया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ता गया. आरोप है कि गाजियाबाद समेत कई स्थानों पर बैठकें आयोजित की गईं और भरोसा मजबूत करने के लिए ग्रोसरी स्टोर भी खोले गए. इन्हीं दुकानों के नाम पर लाखों रुपये के समझौते कराए गए और बड़ी संख्या में लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया.

मुख्य आरोपी पर दुबई भागने का आरोप

एफआईआर में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फैजान खान को इस कथित धोखाधड़ी का प्रमुख षड्यंत्रकर्ता बताया गया है. शिकायत के मुताबिक वह दुबई में होने की बात सामने आई है और व्हाट्सएप वीडियो के जरिए निवेशकों को जल्द पैसा लौटाने का भरोसा दे रहा है. वहीं कंपनी का ऑनलाइन सिस्टम बंद होने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है. पुलिस का कहना है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न जिलों में पहले से भी कई मामले दर्ज बताए जा रहे हैं, जिनकी जानकारी जुटाई जा रही है.

सैकड़ों निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसे

शिकायत के अनुसार महेश कुमार वर्मा ने स्वयं 6.50 लाख रुपये निवेश किए थे. इसके अलावा हरिश हितैषी ने दो लाख, मांगेराम ने तीन लाख रुपये लगाए, जबकि पिलखुवा के संजय और उनके स्टाफ ने करीब 36 लाख रुपये का निवेश किया. आनंद राणा की टीम द्वारा लगभग एक करोड़ रुपये लगाए जाने का भी दावा किया गया है. आरोप है कि गाजियाबाद के सैकड़ों लोगों ने इन कंपनियों में करोड़ों रुपये का निवेश किया था. मामले की जांच उपनिरीक्षक हरिओम को सौंपी गई है और पुलिस निवेशकों से जुड़े दस्तावेजों तथा धन के प्रवाह की विस्तृत पड़ताल कर रही है.

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