'फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक हमारी जिम्मेदारी', चीन की आक्रामकता पर एस जयशंकर का इशारों में जवाब

Indo-Pacific Forum: नई दिल्ली में आयोजित 8वें भारत-जापान हिंद-प्रशांत फोरम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने संबोधन के दौरान एक अहम संदेश दिया, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और संतुलित बनाए रखना न सिर्फ आवश्यक है, बल्कि यह भारत और जापान की साझा जिम्मेदारी भी है.

Free and open Indo-Pacific is our responsibility S Jaishankar gestural response to China aggression
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Indo-Pacific Forum: नई दिल्ली में आयोजित 8वें भारत-जापान हिंद-प्रशांत फोरम में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने संबोधन के दौरान एक अहम संदेश दिया, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और संतुलित बनाए रखना न सिर्फ आवश्यक है, बल्कि यह भारत और जापान की साझा जिम्मेदारी भी है. हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान का संकेत साफ तौर पर चीन की बढ़ती आक्रामकता की ओर माना जा रहा है. जयशंकर ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता और आर्थिक संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है. 

उन्होंने जोर दिया कि भारत-जापान की साझेदारी इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है. जयशंकर ने कहा, “हमारी साझेदारी, जो दशकों में और मजबूत हुई है, न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन में भी योगदान दे रही है.” उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची के बीच हुई बातचीत ने दोनों देशों के संबंधों की प्राथमिकता को और स्पष्ट किया है.

निवेश और व्यापारिक संबंधों पर बड़ा फोकस

जयशंकर ने कहा कि आने वाले दस वर्षों में भारत और जापान के बीच 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य तय किया गया है. यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा. उन्होंने कहा कि साझेदारी का अगला चरण अब सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर्स, क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगा. जयशंकर ने कहा, “भारत और जापान जैसे दो प्रमुख लोकतंत्रों की जिम्मेदारी है कि हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र को स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध बनाएं.”

इजरायल के विदेश मंत्री से भी मुलाकात

इसी कड़ी में जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में इजरायल के विदेश मंत्री गिडोन सार से भी मुलाकात की. दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी, गाजा शांति योजना, और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर चर्चा की.

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “इजरायली विदेश मंत्री गिडोन सार के साथ बेहद सार्थक बातचीत हुई. आतंकवाद पर हमारी ज़ीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों पर चर्चा की.”

चीन के प्रभाव को चुनौती देने की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान चीन को अप्रत्यक्ष संदेश है कि भारत-जापान मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में “फ्री और ओपन” माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं. यह साझेदारी आने वाले वर्षों में न केवल सुरक्षा बल्कि टेक्नोलॉजी और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते भी खोलेगी.

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