Sheikh Hasina Verdict: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने फांसी की सजा सुनाई है. लंबे समय से माना जा रहा था कि इस मामले में कड़ा फैसला आएगा. नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पहले ही अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक चुकी है, इसलिए इस फैसले को हसीना की राजनीतिक वापसी को स्थायी रूप से खत्म करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह बिल्कुल स्पष्ट है कि जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और हत्याओं के पीछे शेख हसीना की प्रत्यक्ष भूमिका थी. अदालत के अनुसार हसीना ने आंदोलन को दबाने के लिए न केवल सुरक्षा बलों को आदेश दिया, बल्कि वह लगातार इस कार्रवाई की जानकारी भी ले रही थीं. ढाका यूनिवर्सिटी के कुलपति को धमकाने और हत्याओं का निर्देश देने को भी अदालत ने गंभीर अपराध माना है. कुल मिलाकर उन्हें 1400 लोगों की हत्या के लिए दोषी करार दिया गया.
शेख हसीना के साथ तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी फांसी की सजा सुनाई गई है.
8747 पन्नों की चार्जशीट, सबूतों का ढेर
ICT ने सोमवार को शेख हसीना, पूर्व गृहमंत्री कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर मानवता के खिलाफ पाँच गंभीर आरोपों पर फैसला सुनाया. ये सभी आरोप जुलाई–अगस्त 2024 के दौरान हुए छात्र आंदोलन से जुड़े हैं.
अभियोजन पक्ष ने अदालत में 8747 पेज की चार्जशीट जमा की थी, जिसमें शामिल थे:
पूर्व IGP मामून ने कई बयानों में सरकारी गवाह बनने की पेशकश की. इस कारण उन्हें एक केस में माफी दी गई, जबकि दूसरे केस में पाँच साल की सजा दी गई. कोर्ट ने कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया और घटना की वास्तविक श्रृंखला का खुलासा किया.
हसीना ने घातक हमलों का आदेश दिया
ICT की तीन सदस्यीय पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति गुलाम मुर्तुजा मोजुमदार कर रहे थे, ने कहा कि जुलाई 2024 की हिंसा किसी अचानक घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि एक “संगठित और योजनाबद्ध दमन अभियान” था.
कोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
अदालत ने कहा कि हसीना की मंजूरी के बिना इस स्तर की सैन्य कार्रवाई संभव ही नहीं थी.
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