मॉस्को: हाल के हफ्तों में रूस की आक्रामक हवाई गतिविधियों और ड्रोन घुसपैठ ने यूरोप में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. नाटो सदस्य देशों के हवाई क्षेत्रों में रूसी विमानों और ड्रोन की घुसपैठ को अब सिर्फ सामरिक चुनौती नहीं, बल्कि रणनीतिक खतरे के रूप में देखा जा रहा है.
ब्रिटेन के पूर्व खुफिया अधिकारी और सैन्य विश्लेषक फिलिप इंग्राम के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ये कार्रवाइयाँ योजना के तहत की जा रही हैं. उन्होंने इस रणनीति को ऐसा बताया है जैसे पुतिन "ऑक्टोपस की तरह यूरोप को अपनी पकड़ में लेने" की कोशिश कर रहे हों.
पुतिन की रणनीति: दहशत और भ्रम फैलाना
फिलिप इंग्राम ने ब्रिटिश मीडिया आउटलेट "द सन" के एक सैन्य विश्लेषण कार्यक्रम "Battle Plans Exposed" में कहा कि रूस की ये हवाई घुसपैठ सिर्फ ताकत दिखाने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह एक गहरी रणनीतिक योजना है.
उनके मुताबिक, पुतिन यूरोपीय देशों को आशंकाओं और अनिश्चितताओं में उलझाकर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि नाटो सदस्य राष्ट्र यूक्रेन को दिए जा रहे आर्थिक और सैन्य समर्थन से ध्यान हटा लें. उनका लक्ष्य है कि पश्चिम अपने संसाधनों को बिखेर दे और सैन्य ध्यान कई मोर्चों पर बांटना पड़े.
नाटो की सीमाओं पर रूसी गतिविधियां
फिलिप इंग्राम ने बताया कि हाल ही में रूसी मिग-31 फाइटर जेट्स ने एस्टोनिया के हवाई क्षेत्र में लगभग 12 मिनट तक घुसपैठ की. यह सामान्य अभ्यास नहीं था, बल्कि सीधे तौर पर नाटो हवाई संप्रभुता की परीक्षा लेने की कोशिश थी. यह घटना केवल एक उदाहरण है, इस प्रकार की घुसपैठ अब लगातार हो रही है.
यूरोप में हाल की प्रमुख घटनाएं:
ड्रोन वॉल: यूरोप की सुरक्षा कवच योजना
रूस की इन गतिविधियों से चिंतित होकर यूरोपीय देश अब एक संयुक्त रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसे “Drone Wall” (ड्रोन वॉल) कहा जा रहा है.
यह एक बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली होगी, जिसका उद्देश्य है:
फिलिप इंग्राम ने बताया कि आज की स्थिति में कई बार महंगे मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करके सस्ते ड्रोन गिराए जाते हैं, जो रणनीतिक रूप से घाटे का सौदा होता है. ड्रोन वॉल इस असंतुलन को दूर करेगी और कम लागत पर उच्च सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.
रूस की प्रतिक्रिया
क्रेमलिन और रूसी मीडिया ने इन घटनाओं को लेकर जारी रिपोर्टों को "पश्चिमी दुष्प्रचार" बताया है. रूस का कहना है कि वह किसी भी नाटो देश की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं कर रहा है और यह सब राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित आरोप हैं. हालांकि, जमीन पर हो रही घटनाएं, घुसपैठ और एयरस्पेस उल्लंघनों की पुष्टि विभिन्न यूरोपीय एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है.
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