Haunted 3D Echoes Of The Past: Raaz वाला रहस्य नहीं, 1920 वाला खौफ नहीं... क्या खो गया विक्रम भट्ट का जादू?

एक दौर था जब विक्रम भट्ट का नाम सुनते ही दर्शकों को Raaz, 1920 और Haunted 3D जैसी फिल्में याद आ जाती थीं. उनकी फिल्मों में सिर्फ भूत नहीं होते थे, बल्कि एक रहस्य, एक माहौल और ऐसा डर होता था जो फिल्म खत्म होने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता था.

Entertainment Haunted 3D Echoes of the Past Review Has Vikram Bhatt lost his magic
Image Source: Social Media

निर्देशक : विक्रम भट्ट
कास्ट : चेतना पांडे, महाक्षय चक्रवर्ती, मानवीर चौधरी, प्रनीत भट्ट, हेमंत पांडे, गौरव बाजपाई, सुनील शाक्या, तिलक राज जोशी
अवधि : 2 घंटे 20 मिनट
रेटिंग: 2.5 ⭐

एक दौर था जब विक्रम भट्ट का नाम सुनते ही दर्शकों को Raaz, 1920 और Haunted 3D जैसी फिल्में याद आ जाती थीं. उनकी फिल्मों में सिर्फ भूत नहीं होते थे, बल्कि एक रहस्य, एक माहौल और ऐसा डर होता था जो फिल्म खत्म होने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता था. लेकिन Haunted 3D: Ghosts Of The Past उस विरासत के सामने बेहद कमजोर साबित होती है.

Raaz जैसा सस्पेंस नहीं, सिर्फ शोर

Raaz की सबसे बड़ी ताकत उसका सस्पेंस और माहौल था. वहां डर धीरे-धीरे दर्शकों के दिमाग में उतरता था. Ghosts Of The Past में डर पैदा करने की बजाय तेज आवाजों और अचानक आने वाले जंप स्केयर्स पर ज्यादा भरोसा किया गया है. न कहानी में वह रहस्य है और न ही स्क्रीन पर वह बेचैनी जो Raaz को यादगार बनाती थी.

1920 की तरह खौफनाक वातावरण भी नहीं

1920 की हवेली, मोमबत्तियों की रोशनी और अंधेरे गलियारों ने एक अलग ही डर पैदा किया था. दर्शक उस दुनिया में खो जाते थे. Ghosts Of The Past में वही माहौल बनाने की कोशिश तो की गई है, लेकिन ज्यादातर दृश्य कृत्रिम लगते हैं. जहां 1920 में लोकेशन खुद एक किरदार थी, वहीं यहां सेट और विजुअल्स कई बार वीडियो गेम जैसे महसूस होते हैं.

2011 की Haunted 3D से भी कमजोर

सबसे बड़ा झटका यह है कि फिल्म अपनी ही फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म के स्तर तक नहीं पहुंच पाती. 2011 की Haunted 3D भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3D हॉरर फिल्म थी और उस समय इसकी तकनीक और भावनात्मक कहानी दोनों की तारीफ हुई थी. आज 15 साल बाद आई यह नई फिल्म तकनीकी रूप से आगे दिखने के बजाय पीछे जाती नजर आती है.

मिमोह चक्रवर्ती की वापसी, लेकिन असर नहीं

मिमोह चक्रवर्ती की वापसी से उम्मीद थी कि पुरानी Haunted की यादें ताजा होंगी. लेकिन कमजोर लेखन और सपाट किरदार उनके अभिनय को भी सीमित कर देते हैं. जहां पहली फिल्म में उनका किरदार कहानी का भावनात्मक केंद्र था, यहां वह सिर्फ घटनाओं का हिस्सा बनकर रह जाता है.

चेतना पांडे का किरदार अधूरा

चेतना पांडे स्क्रीन पर मौजूद तो हैं, लेकिन उनका किरदार कहानी में कोई गहरी छाप नहीं छोड़ता. हॉरर फिल्मों में मजबूत महिला किरदार डर और भावनाओं दोनों को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन यहां उनका रोल सिर्फ घटनाओं को जोड़ने वाला माध्यम बनकर रह जाता है.

VFX ने तोड़ दिया डर का भ्रम

विक्रम भट्ट की पुरानी फिल्मों में सीमित तकनीक होने के बावजूद डर असली लगता था. यहां आधुनिक तकनीक होने के बावजूद कई दृश्य नकली महसूस होते हैं. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं में भी VFX, ग्रीन स्क्रीन और कृत्रिम विजुअल्स को लेकर काफी आलोचना हुई है. कई दर्शकों ने तो इसे "AI जैसा" और "टीवी सीरियल से भी कमजोर" तक बताया.

संगीत भी नहीं बचा पाया

Raaz, 1920 और Haunted 3D की पहचान उनके संगीत से भी थी. "जानिया", "आया रे" और अन्य गाने फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रहते थे. लेकिन Ghosts Of The Past का संगीत कहानी को ऊंचाई देने में नाकाम रहता है. कई दर्शकों ने भी माना कि पुरानी Haunted की भावनात्मक गहराई और संगीत इस नई फिल्म में गायब है.

फैसला

Haunted 3D: Ghosts Of The Past एक ऐसी हॉरर फिल्म है जो अपने नाम और फ्रेंचाइजी की विरासत का फायदा तो उठाती है, लेकिन उसके स्तर तक पहुंच नहीं पाती. विक्रम भट्ट का पुराना खौफ, मिमोह की वापसी और चेतना पांडे की मौजूदगी, इनमें से कोई भी फिल्म को यादगार नहीं बना पाता.

Haunted 3D: Ghosts Of The Past देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या यह वही विक्रम भट्ट हैं जिन्होंने Raaz, 1920 और Haunted 3D जैसी फिल्में बनाई थीं? जहां उनकी पुरानी फिल्मों में डर, रहस्य और भावनाएं साथ चलती थीं, वहीं यह फिल्म सिर्फ तकनीकी दिखावे और कमजोर पटकथा में उलझकर रह जाती है.विक्रम भट्ट की पुरानी हॉरर फिल्मों ने रातों की नींद उड़ाई थी, ‘Ghosts Of The Past’ सिर्फ धैर्य की परीक्षा लेती है.