ED का बड़ा एक्शन, टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ मामले में 5 राज्यों के 13 ठिकानों पर की ताबड़तोड़ रेड

Terror Funding Case: टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क पर ED का बड़ा एक्शन, 5 राज्यों में 13 ठिकानों पर छापेमारी

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Terror Funding Case: देश में कथित टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ से जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को एक बड़े समन्वित अभियान के तहत पांच राज्यों में एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई ऐसे संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क की जांच का हिस्सा है, जिस पर अवैध विदेशी नागरिकों की भारत में घुसपैठ कराने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और संदिग्ध लेनदेन के जरिए धन के इस्तेमाल का आरोप है. जांच एजेंसी का मानना है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं और इसमें कुछ संस्थानों तथा व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.

पांच राज्यों में 13 ठिकानों पर ED की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की. जांच एजेंसी की टीमों ने पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में कुल 13 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की. इस अभियान का नेतृत्व ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने किया, जिसमें संबंधित राज्यों की पुलिस का भी सहयोग लिया गया. दिल्ली के बाटला हाउस और मदनपुर खादर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, महाराष्ट्र के रायगढ़ और पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना, नॉर्थ 24 परगना, कोलकाता तथा मुर्शिदाबाद में तलाशी अभियान चलाया गया. अधिकारियों के अनुसार कई स्थानों से दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.

कई संस्थानों और संदिग्धों के ठिकानों पर जारी है तलाशी

ईडी की जांच सिर्फ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ संस्थानों की भूमिका भी जांच के घेरे में है. अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली के मदनपुर खादर स्थित सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी, पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में कबीरबाग मिल्लत एकेडमी और हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम सहित कई स्थानों पर तलाशी जारी है.

इसके अलावा जांच एजेंसी कुछ ऐसे लोगों से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाल रही है, जिन पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है. बरामद दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी.

यूपी ATS की FIR से शुरू हुई जांच

अधिकारियों के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है. इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि एक संगठित गिरोह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध तरीके से घुसपैठ कराने में सक्रिय था. जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने के बाद इन लोगों के लिए फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य भारतीय पहचान पत्र तैयार करवाने में भी मदद करता था. इतना ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें बसाने और स्थानीय स्तर पर पहचान स्थापित कराने में भी सहयोग दिए जाने की आशंका जताई गई है.

जांच में सामने आया संदिग्ध फाइनेंशियल नेटवर्क

ईडी की शुरुआती जांच में एक जटिल वित्तीय नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और सामाजिक संस्थाओं को बड़ी मात्रा में विदेशी चंदा प्राप्त हुआ, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया. जांच एजेंसी को ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनके जरिए धन को अलग-अलग चरणों में ट्रांसफर किया गया. इसमें म्यूल अकाउंट, कई बैंकिंग लेयर और छोटे-छोटे लेनदेन के माध्यम से पैसों की आवाजाही के संकेत मिले हैं. जांच का फोकस अब इस बात पर भी है कि इन पैसों का अंतिम उपयोग किन गतिविधियों में किया गया.

नकद निकासी और छोटे ट्रांजैक्शन भी जांच के दायरे में

ईडी के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध लाभार्थियों के खातों में रकम भेजने के बाद बड़े पैमाने पर नकद निकासी की गई. इसके अलावा कम राशि वाले कई ट्रांजैक्शन भी मिले हैं, जिन्हें जांच एजेंसी संदिग्ध मान रही है. अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के छोटे-छोटे लेनदेन का इस्तेमाल अक्सर धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाने के लिए किया जाता है. इसी वजह से बैंक खातों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और विदेशी फंडिंग के पूरे नेटवर्क की विस्तार से जांच की जा रही है.

दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की होगी गहन जांच

फिलहाल सभी स्थानों पर तलाशी की कार्रवाई जारी है और जांच एजेंसियां जब्त किए गए दस्तावेजों, मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विश्लेषण कर रही हैं. इन सबूतों के आधार पर आगे पूछताछ, गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता. ईडी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित टेरर फंडिंग, अवैध घुसपैठ और मनी लॉन्ड्रिंग के बीच किस तरह का संबंध है और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग तथा संस्थाएं शामिल थीं. आने वाले दिनों में जांच के दायरे का और विस्तार होने की संभावना जताई जा रही है.

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