CWG 2026: एक हाथ गंवाया, लेकिन हिम्मत नहीं... दिलीप गावित ने भारत को दिलाया गोल्ड, बेसिल ने जीता सिल्वर

Commonwealth Games 2026: ग्लासगो में खेले गए पैरा एथलेटिक्स T47 वर्ग की 100 मीटर रेस में दिलीप गावित ने आखिरी 30 मीटर में शानदार वापसी कर गोल्ड जीता, जबकि मोहम्मद बेसिल ने सिल्वर अपने नाम कर भारत को ऐतिहासिक डबल पोडियम दिलाया.

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Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए सातवां दिन यादगार बन गया. जिस एथलेटिक्स ट्रैक पर भारत के लिए गोल्ड मेडल की खबरें कम ही सुनने को मिलती हैं, उसी ट्रैक पर भारतीय पैरा एथलीटों ने इतिहास रच दिया. 23 वर्षीय दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की टी47 श्रेणी की 100 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. खास बात यह रही कि इसी स्पर्धा में भारत के मोहम्मद बेसिल ने भी शानदार दौड़ लगाकर रजत पदक जीता. एक ही रेस में भारत का गोल्ड और सिल्वर जीतना देश के लिए गर्व का पल बन गया.

भारत की झोली में आया तीसरा गोल्ड

ग्लासगो के स्कॉटस्टन स्टेडियम में आयोजित पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता के टी47 वर्ग की 100 मीटर फाइनल रेस भारत के लिए बेहद खास साबित हुई. इस स्पर्धा में भारत के दो एथलीट फाइनल में पहुंचे थे और दोनों ने उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन किया. दिलिप गावित के स्वर्ण और मोहम्मद बेसिल के रजत पदक के साथ भारत के खाते में तीसरा गोल्ड मेडल जुड़ गया, जबकि कुल पदकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई.

आखिरी 30 मीटर में बदली पूरी कहानी

फाइनल रेस की शुरुआत में मुकाबला पूरी तरह इंग्लैंड के केविन सैंटोस और भारत के मोहम्मद बेसिल के बीच दिखाई दे रहा था. शुरुआती मीटरों में दोनों धावकों ने जबरदस्त बढ़त बना ली थी, जबकि दिलिप गावित पांचवें स्थान पर चल रहे थे. ऐसा लग रहा था कि गोल्ड मेडल की दौड़ अब उनके हाथ से निकल चुकी है. लेकिन जैसे ही अंतिम 30 मीटर बाकी रहे, दिलिप ने अपनी रफ्तार में ऐसा विस्फोट किया कि देखते ही देखते सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया. उनकी स्पीड इतनी तेज थी कि कुछ ही सेकेंड में वे सीधे पहले स्थान पर पहुंच गए और किसी को वापसी का मौका नहीं दिया.

कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण

दिलीप  गावित ने 10.71 सेकेंड का समय निकालते हुए न सिर्फ गोल्ड मेडल जीता, बल्कि टी47 वर्ग में कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. वहीं दूसरे स्थान के लिए मोहम्मद बेसिल और इंग्लैंड के केविन सैंटोस के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ. फोटो फिनिश में मामूली अंतर से बेसिल ने बाजी मारते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया और भारत के लिए ऐतिहासिक डबल पोडियम पूरा किया.

बचपन का हादसा नहीं रोक पाया सपनों की उड़ान

महाराष्ट्र के नासिक जिले से आने वाले दिलिप महादु गावित की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है. बचपन में एक दुर्घटना के दौरान पेड़ से गिरने के कारण उनका दायां हाथ काटना पड़ा. इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी चुनौती किसी भी इंसान का आत्मविश्वास तोड़ सकती थी, लेकिन दिलिप ने हार मानने के बजाय खेल को अपनी ताकत बना लिया.

एक हाथ खोने के बावजूद उन्होंने खुद को कमजोर नहीं समझा. स्थानीय कोच की देखरेख में उन्होंने स्प्रिंट दौड़ की बारीकियां सीखीं और लगातार मेहनत करते रहे. उनकी लगन ने जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा दिया.

खेलो इंडिया से शुरू हुआ सफर

दिलीप  के करियर को पहली बड़ी पहचान 2019 में मिली, जब वे खेलो इंडिया गेम्स में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान मजबूत की. उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें भारतीय पैरा एथलेटिक्स के उभरते सितारों में शामिल कर दिया. हर प्रतियोगिता के साथ उनका आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों बेहतर होते गए.

एशियन गेम्स से कॉमनवेल्थ तक गोल्डन सफर

दिलीप के करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2023 के हांगझोउ पैरा एशियन गेम्स में आया, जहां उन्होंने टी47 वर्ग की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा. इसके बाद उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए 400 मीटर छोड़कर 100 मीटर स्पर्धा पर अपना पूरा फोकस लगाया. यह फैसला उनके करियर के लिए गेम चेंजर साबित हुआ. नई स्पर्धा में लगातार अभ्यास और बेहतर तकनीक की बदौलत उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर साबित कर दिया कि सही निर्णय और कड़ी मेहनत किसी भी चुनौती को सफलता में बदल सकती है.

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