Ravana Past Life: रामायण की बात होते ही रावण का नाम जरूर सामने आता है. लंकापति रावण को उसकी अद्भुत शक्तियों, ज्ञान और अपार बल के लिए जाना जाता है. वह एक महान योद्धा था, लेकिन उसके अहंकार ने उसके विनाश की राह तैयार कर दी. मान्यता है कि रावण का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था, जबकि उसकी माता कैकसी राक्षसी थीं. इसी वजह से आगे चलकर वह राक्षसों का राजा बना.
हालांकि, रावण के पूर्वजन्म को लेकर रामचरित मानस में एक अलग कहानी मिलती है. इसके अनुसार रावण जन्म से ही राक्षस नहीं था, बल्कि पिछले जन्म में भगवान विष्णु का भक्त था. एक श्राप के कारण उसे अगले जन्म में राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा. आइए जानते हैं कि रावण अपने पूर्वजन्म में कौन था और उसे यह श्राप कैसे मिला.
पूर्वजन्म में कौन था लंकापति रावण?
रामचरित मानस के अनुसार, रावण अपने पिछले जन्म में राक्षस नहीं बल्कि राजा प्रतापभानु था. प्रतापभानु एक धर्मात्मा राजा था. वह पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और ब्राह्मणों की सेवा में आगे रहता था. हालांकि, उसके मन में सांसारिक इच्छाएं भी थीं और वह अजर-अमर होना चाहता था.
एक बार राजा प्रतापभानु शिकार करते हुए एक मृग के पीछे जंगल में काफी दूर तक चले गए. जंगल में उनकी मुलाकात एक कपटी मुनि से हुई, जिसका नाम एकतन बताया गया है. प्रतापभानु उसकी बातों में आ गए. उस मुनि ने राजा को विश्वास दिलाया कि उनके गुरु ही उनकी तरक्की में बाधा बन रहे हैं और उन्हें गुरु को रास्ते से हटाने की सलाह दी.
प्रतापभानु ने उसकी बात मानकर अपने गुरु का अपहरण करवा दिया. इसके बाद कपटी मुनि ने ब्राह्मणों के भोजन में मांस मिला दिया. इस घटना से नाराज होकर ब्राह्मणों ने राजा प्रतापभानु को अगले जन्म में राक्षस योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया.
कैसे मिली प्रतापभानु को श्राप से मुक्ति?
ब्राह्मणों का श्राप मिलने के बाद राजा प्रतापभानु काफी दुखी हो गए. उन्होंने अपनी गलती के लिए ब्राह्मणों से माफी मांगी और बताया कि उनसे यह सब अनजाने में हुआ. तब ब्राह्मणों ने कहा कि दिया गया श्राप वापस नहीं लिया जा सकता.
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रतापभानु निर्दोष था, इसलिए अगले जन्म में राक्षस बनने के बाद भी उसका बल और वैभव बहुत बड़ा होगा. साथ ही, स्वयं भगवान विष्णु मनुष्य रूप में जन्म लेकर उसका वध करेंगे. भगवान के हाथों मृत्यु मिलने से उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी.
श्राप के कुछ समय बाद पड़ोसी राजाओं ने प्रतापभानु के राज्य पर हमला कर दिया. युद्ध में राजा प्रतापभानु और उनके भाई अरिमर्दन की मृत्यु हो गई. इसके साथ ही उनका पूरा वंश भी समाप्त हो गया. मान्यता के अनुसार, अगले जन्म में प्रतापभानु राक्षस राजा रावण और अरिमर्दन कुंभकर्ण के रूप में जन्मे.
वहीं प्रतापभानु का बुद्धिमान मंत्री धर्मरुचि अगले जन्म में विभीषण बना. इस तरह एक श्राप के कारण धर्मपरायण राजा प्रतापभानु को राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा और वह आगे चलकर लंका का राजा रावण बना.
रामचरित मानस के बालकांड में राजा प्रतापभानु की कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है. मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में जन्म लेकर रावण का वध किया और उसे मोक्ष प्रदान किया.
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