बदल गया राजधानी का हाल... धुएं में कैद हुई दिल्ली, जानें कितना दर्ज हुआ आज का AQI

दिल्ली की हवा एक बार फिर से लोगों की सेहत के लिए खतरा बनने लगी है. त्योहारों का मौसम शुरू होते ही राजधानी की आबोहवा फिर ज़हर घोलने लगी है. लंबे समय बाद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) फिर से ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया है.

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दिल्ली की हवा एक बार फिर से लोगों की सेहत के लिए खतरा बनने लगी है. त्योहारों का मौसम शुरू होते ही राजधानी की आबोहवा फिर ज़हर घोलने लगी है. लंबे समय बाद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) फिर से ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया है. बढ़ती ठंड, धीमी हवाएं और आस-पास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं – ये सभी मिलकर दिल्ली के प्रदूषण स्तर को तेजी से ऊपर ले जा रहे हैं.

ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली का औसत AQI 211 तक पहुंच गया, जो ‘Poor’ कैटेगरी में आता है. यह जून के बाद पहली बार है जब AQI 200 के पार गया है. सोमवार को यह आंकड़ा 189 था. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान गिरने और हवा की गति धीमी पड़ने से प्रदूषक तत्व वातावरण में फंसने लगे हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है.

GRAP स्टेज 1 लागू – क्या बदलेगा?

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ यानी GRAP के पहले चरण को लागू कर दिया गया है. इसके तहत 27 जरूरी उपाय लागू किए जाएंगे:

  • सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव
  • प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई
  • खुले में कचरा या मलबा जलाने पर रोक

रजिस्ट्रेशन न कराने वाली निर्माण साइट्स को बंद करने का आदेश

यह स्टेज तब लागू होता है जब AQI 200 के पार पहुंचता है. इससे ऊपर अगर AQI 300 (Very Poor), 350 (Severe), या 400 (Severe Plus) हो जाए, तो GRAP के अगले चरण भी क्रमशः लागू किए जाते हैं.

पराली का धुआं: आने वाले दिनों में बड़ा खतरा

हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने के मामले अब धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. बीते एक हफ्ते में करीब 70 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 31 सिर्फ मंगलवार को सामने आईं. अभी तक पराली का दिल्ली की हवा में योगदान 0.5% है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर के पहले सप्ताह तक यह तेजी से बढ़ेगा और दिल्ली की हवा और भी खराब हो जाएगी.

दिल्ली का अपना प्रदूषण भी कम नहीं

हालांकि इस साल बारिश के चलते शुरुआती राहत मिली थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण कम नहीं हुआ. वाहन, कंस्ट्रक्शन साइट्स और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां अभी भी दिल्ली की हवा को जहरीला बना रही हैं. एयर क्वालिटी एक्सपर्ट स्वगता डे के अनुसार, पराली भले ही बाहर से आती है, लेकिन दिल्ली का अपना प्रदूषण कहीं ज्यादा स्थायी और घातक है. एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण में सबसे अधिक 19.8% हिस्सा वाहनों का, 9.3% गुरुग्राम से आने वाले प्रदूषकों का और 5.1% रिहायशी इलाकों का है.

मौसम से भी नहीं मिल रही राहत

दिल्ली का तापमान धीरे-धीरे गिर रहा है, जिससे हवा में नमी बढ़ रही है और प्रदूषक तत्व ज़मीन के करीब जमा हो रहे हैं. आने वाले दिनों में कोहरा और धुंध छाने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि 19 अक्टूबर से राजधानी में हल्के कोहरे की शुरुआत हो सकती है. वहीं स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के अनुसार, न तो तेज़ हवाओं की कोई संभावना है और न ही बारिश की – जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं.

हर साल वही कहानी – सबक फिर नहीं लिया गया?

पिछले साल दिवाली के बाद दिल्ली का AQI 494 तक पहुंच गया था, जो ‘Severe’ श्रेणी का बेहद खतरनाक स्तर है. 2023 में यह 468 और 2022 में 450 तक गया था. हर बार की तरह इस बार भी हालात दोहराए जा रहे हैं – योजना है, पर अमल अधूरा है.त्योहारों के साथ-साथ जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी, हवा का बहाव और धीमा होगा और पराली का धुआं दिल्ली में घुसेगा. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो महीने राजधानीवासियों के लिए सबसे मुश्किल साबित हो सकते हैं.

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