दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाली लाखों महिला यात्रियों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने जा रही है. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने पहली बार विशेष प्रशिक्षण प्राप्त महिला कमांडो यूनिट को दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया है. शुरुआती चरण में 66 महिला कमांडो को तैनात किया गया है, जिन्हें संवेदनशील मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. इनका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि महिला यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध कराना भी है.
संवेदनशील स्टेशनों और मेट्रो कोच में रहेंगी सक्रिय
सीआईएसएफ की ये महिला कमांडो क्विक रिएक्शन टीम (QRT) का हिस्सा होंगी और उन्हें कश्मीरी गेट, राजीव चौक, नई दिल्ली, चांदनी चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, सरोजनी नगर और दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस जैसे व्यस्त मेट्रो स्टेशनों पर तैनात किया जाएगा. इसके अलावा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के प्रमुख स्टेशनों पर भी इनकी मौजूदगी रहेगी. ये कमांडो समय-समय पर मेट्रो ट्रेनों में भी सवार होंगी और विशेष रूप से महिला कोच का निरीक्षण करेंगी. उनका ध्यान इस बात पर रहेगा कि महिला डिब्बे में कोई पुरुष यात्री नियमों का उल्लंघन करते हुए यात्रा न कर रहा हो.
महिला यात्रियों से बदसलूकी पर होगी सख्त कार्रवाई
महिला कमांडो की जिम्मेदारी केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी. यदि किसी महिला यात्री के साथ छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार या किसी भी प्रकार की बदतमीजी की शिकायत सामने आती है तो ये मौके पर तत्काल कार्रवाई करने में सक्षम होंगी. उनका उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि अपनी मौजूदगी से ऐसी घटनाओं को रोकना भी होगा. इनकी तैनाती केवल दिल्ली की सीमाओं तक सीमित नहीं होगी. दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क जहां-जहां उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक फैला हुआ है, वहां भी जरूरत के अनुसार ये महिला कमांडो सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी.
एनएसजी स्तर की ट्रेनिंग से तैयार हुई हैं कमांडो
इन महिला कमांडो को विशेष कमांडो प्रशिक्षण दिया गया है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है. सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन के मार्गदर्शन और मेट्रो इकाई के डीआईजी आईपीएस संतोष चालके की निगरानी में इन्हें विभिन्न चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया है. आतंकी हमले, बंधक जैसी स्थिति, आपातकालीन सुरक्षा अभियान और किसी भी बड़े संकट के दौरान त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता इन कमांडो को विशेष बनाती है.
आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक उपकरणों से रहेंगी लैस
महिला कमांडो आधुनिक हथियारों और सुरक्षा उपकरणों से लैस रहेंगी. यदि किसी कारणवश मेट्रो ट्रेन बीच रास्ते में रुक जाती है या किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलती है तो ये कमांडो तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी निभाएंगी. सीआईएसएफ का मानना है कि तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए प्रशिक्षित महिला कमांडो की मौजूदगी यात्रियों के बीच भरोसा बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाएगी.
22-22 सदस्यीय तीन क्विक रिएक्शन टीम बनाई गईं
पहले चरण में नियुक्त 66 महिला कमांडो को 22-22 सदस्यों की तीन अलग-अलग क्विक रिएक्शन टीमों में विभाजित किया गया है. इन टीमों की तैनाती उन स्टेशनों पर प्राथमिकता के आधार पर होगी, जहां महिला यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रहती है और भीड़ के कारण सुरक्षा संबंधी चुनौतियां ज्यादा होती हैं. हालांकि दिल्ली मेट्रो में पहले भी सीआईएसएफ की महिला कर्मियों की तैनाती रही है, लेकिन यह पहला अवसर है जब पूर्ण कमांडो प्रशिक्षण प्राप्त महिला सुरक्षा बल को सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है.
ये भी पढ़ें: दिल्ली में मॉनसून की धमाकेदार एंट्री, 15 फ्लाइट्स डायवर्ट, कई जगहों पर देखने को मिला जाम का कहर