नई दिल्ली: दिल्ली के पॉश और उच्च वर्गीय इलाकों जैसे ग्रेटर कैलाश और जीके में साइबर ठगों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. इन इलाकों में रहने वाले बुजुर्ग करोड़पति व्यापारी इन ठगों का प्रमुख निशाना बन रहे हैं. विशेष रूप से, ऐसी कॉलोनियों में रहने वाले अकेले और असुरक्षित बुजुर्गों को ठग बड़ी आसानी से अपनी जाल में फंसा रहे हैं.
डिजिटल गिरफ्तारी का खौफ
साइबर ठग अब बुजुर्गों को डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर डरा कर ठगी को अंजाम दे रहे हैं. पिछले पांच दिनों में, इन ठगों ने दिल्ली के इन संपन्न इलाकों में दो बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है. दोनों ही मामलों में एक ही पैटर्न का पालन किया गया है. ठगों ने पहले बुजुर्गों को झूठे केस में फंसाने का डर दिखाया और फिर उनकी सहमति से करोड़ों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए.
बुजुर्ग कारोबारी से 7 करोड़ की ठगी
अब ताजा घटना ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 की है, जहां 70 वर्षीय महिला कारोबारी को तीन दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया. इन तीन दिनों के दौरान ठगों ने महिला के खातों से करीब सात करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए. पीड़िता ने इस मामले की शिकायत जीके-1 थाने में दर्ज कराई है. इस घटना के बाद, पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना दिल्ली में बढ़ते साइबर अपराधों की ओर इशारा करती है.
पांच दिन में दूसरी बड़ी साइबर ठगी
सिर्फ एक ही इलाका नहीं, बल्कि ग्रेटर कैलाश के बाद कुछ ही दिन पहले, सीआर पार्क इलाके में भी एक और ठगी हुई थी. यहां पर एक एनआरआई दंपती को 18 दिन तक डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर फंसा लिया गया और उनसे 15 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी. यह घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और पुलिस प्रशासन को इन साइबर ठगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है.
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