रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के आगामी भारत दौरे से पहले, भारत ने अमेरिका के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने के लिए करीब 8,000 करोड़ रुपये की डिफेंस डील पर करार किया है. इस समझौते के तहत भारतीय नौसेना के 24 एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टरों के लिए पांच साल का “फॉलो-ऑन सपोर्ट” पैकेज लागू किया गया है.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह करार केवल हेलीकॉप्टरों की मेंटेनेंस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी सहायता, पुर्जों की आपूर्ति, प्रशिक्षण, मरम्मत और ऑपरेशनल सपोर्ट सहित कई व्यापक प्रावधान शामिल हैं.
एमएच-60आर सीहॉक: हर मौसम में तैयार
लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एमएच-60आर हेलीकॉप्टर ब्लैकहॉक का समुद्री संस्करण है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन और सतही युद्ध संचालन के लिए डिजाइन किया गया है. यह हेलीकॉप्टर कठिन मौसम और समुद्री परिस्थितियों में भी अपनी उच्च क्षमता बनाए रखता है.
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि फॉलो-ऑन सपोर्ट पैकेज के आने से इन हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल तैयारियों में काफी सुधार होगा. इसके अलावा, इस समझौते से भारत को लंबी अवधि में क्षमता निर्माण (Capability Build-up) में मदद मिलेगी और विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होगी.
भारत ने फरवरी 2020 में 24 एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए अमेरिका के साथ एक बड़ा समझौता किया था. इसके बाद 2021 में भारत को इस बेड़े के पहले तीन हेलीकॉप्टर मिल चुके हैं. अब यह फॉलो-ऑन सपोर्ट पैकेज उन्हें लंबी अवधि तक पूरी क्षमता के साथ ऑपरेट करने में सहायक होगा.
फॉलो-ऑन सपोर्ट पैकेज के प्रमुख घटक
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार फॉलो-ऑन सपोर्ट पैकेज में निम्नलिखित प्रावधान शामिल हैं:
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस करार से भारत की स्वदेशी उद्योग क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. MSMEs और अन्य भारतीय फर्मों के जरिए हेलीकॉप्टरों के लिए स्थानीय पुर्जों और सेवाओं का विकास संभव होगा. इससे न केवल भारतीय नौसेना के ऑपरेशनल स्तर में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय उद्योगों के लिए भी रोजगार और तकनीकी विशेषज्ञता के अवसर बढ़ेंगे.
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की नई दिशा
यह डील ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव के बावजूद रक्षा सहयोग को और मजबूती देने की कोशिश की जा रही है. अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में तनाव बना हुआ था. ऐसे में यह डील दोनों देशों के रक्षा और सुरक्षा सहयोग को स्थिर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
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