दिन में अंधेरा और आसमान में तारे! 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण क्यों है इतना खास? जानें पूरी जानकारी

Solar Eclipse 2026: साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस वर्ष दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों की नजरें कई बड़े खगोलीय घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं.

Darkness in the day and stars in the sky Why is the solar eclipse of August 12 2026 so special
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Solar Eclipse 2026: साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस वर्ष दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों की नजरें कई बड़े खगोलीय घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं. खास बात यह है कि पूरे साल में कुल चार ग्रहण लगने वाले हैं, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं. इनमें से कुछ ग्रहण पहले ही हो चुके हैं, लेकिन अब सबसे ज्यादा चर्चा 12 अगस्त 2026 को लगने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण की हो रही है. 

वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रहण साल की सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में से एक माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस पूर्ण सूर्य ग्रहण की अवधि करीब 1 मिनट 53 सेकंड होगी. इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और पृथ्वी के कई हिस्सों में दिन के समय कुछ मिनटों के लिए अंधकार जैसा दृश्य दिखाई देगा. यही वजह है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक, फोटोग्राफर और खगोल प्रेमी इस दुर्लभ नजारे को देखने की तैयारी कर रहे हैं.

किन देशों में दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?

12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा. आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन के कुछ इलाकों में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा. इन क्षेत्रों में कुछ मिनटों के लिए सूर्य पूरी तरह गायब हो जाएगा और आसमान में अंधेरा छा जाएगा.

इसके अलावा पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में यह ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा. कुछ क्षेत्रों में सूर्य का केवल एक हिस्सा ढका हुआ नजर आएगा. वहीं कुछ जगहों पर सूर्य के चारों ओर चमकती हुई अग्नि जैसी आकृति दिखाई दे सकती है, जिसे आम भाषा में “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है. हालांकि तकनीकी रूप से यह दृश्य आमतौर पर वलयाकार ग्रहण में देखा जाता है, लेकिन आंशिक और पूर्ण ग्रहण के दौरान भी कई बार ऐसा प्रभाव महसूस होता है.

पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान क्या होता है?

पूर्ण सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है. इस स्थिति में सूर्य की रोशनी कुछ समय के लिए पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती, जिससे दिन में भी रात जैसा अंधेरा दिखाई देता है.

इस दौरान वातावरण में कई बदलाव महसूस किए जाते हैं. तापमान में हल्की गिरावट आती है, पक्षी और जानवर असामान्य व्यवहार करने लगते हैं और आसमान में तारे तक दिखाई देने लगते हैं. ग्रहण के समय सूर्य की बाहरी परत, जिसे कोरोना कहा जाता है, स्पष्ट रूप से नजर आती है. वैज्ञानिकों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि वे सूर्य की बाहरी परत और उससे निकलने वाली ऊर्जा का अध्ययन कर पाते हैं.

क्यों खास है अगस्त 2026 का ग्रहण?

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी पर लगभग हर डेढ़ साल में कहीं न कहीं पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, लेकिन किसी बड़े आबादी वाले क्षेत्र में इसका दिखाई देना काफी दुर्लभ माना जाता है. यही वजह है कि अगस्त 2026 का यह ग्रहण खास महत्व रखता है.

यूरोप के लिए यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 1999 के बाद पहली बार यूरोप के बड़े हिस्से में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा. वहीं आइसलैंड में 1954 के बाद पहली बार लोग इस दुर्लभ खगोलीय दृश्य को देख पाएंगे. इसी कारण दुनिया भर से हजारों लोग इन देशों की यात्रा की योजना बना रहे हैं.

क्या भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण?

भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा. खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहण के समय भारत में रात होगी और सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा. इसलिए भारत के लोग इस पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रत्यक्ष दृश्य नहीं देख पाएंगे.

यह ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, आर्कटिक क्षेत्र और आसपास के इलाकों में ही दिखाई देगा. हालांकि भारतीय खगोल प्रेमी इसे ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रसारण के जरिए देख सकते हैं.

क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूतक काल तभी मान्य माना जाता है जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई दे रहा हो. चूंकि 12 अगस्त 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा.

इस वजह से भारत में इस दिन किसी प्रकार की धार्मिक पाबंदी लागू नहीं होगी. लोग सामान्य रूप से पूजा-पाठ, भोजन बनाना, भोजन करना और अन्य दैनिक कार्य कर सकेंगे. मंदिरों के कपाट बंद रखने जैसी परंपराएं भी लागू नहीं होंगी. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि भारत में यह ग्रहण धार्मिक दृष्टि से प्रभावी नहीं माना जाएगा.

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