Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और शांति समझौते की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते की घोषणा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के संकेत मिलने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज नरमी आई है.
ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.5 फीसदी से अधिक गिरकर 83.48 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गई, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) करीब 5 फीसदी टूटकर 80.61 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.
युद्ध के दौरान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था तेल
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आया था. एक समय ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था. युद्ध से पहले इसकी कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई थी.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई थीं. यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है.
होर्मुज खुलने से बढ़ेगी सप्लाई
विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है. इससे एशियाई देशों सहित कई बड़े आयातक देशों को खाड़ी क्षेत्र से तेल की नियमित आपूर्ति मिलने लगेगी. आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है.
इसके अलावा, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने भी जुलाई से उत्पादन कोटा बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध होने की संभावना है.
ट्रंप ने किया समझौते का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तत्काल प्रभाव से खोलने और क्षेत्र में लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने भी समझौते की पुष्टि की है. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
भारत को कैसे होगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से आयात लागत कम हो सकती है. यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. हालांकि घरेलू कीमतों में बदलाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा.