SIR करवाने का संवैधानिक अधिकार... सुप्रीम कोर्ट में EC की बड़ी जीत, कहा- प्रक्रिया में कोई खामी नहीं

SC On SIR: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को बिहार में वोटर लिस्ट की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग के पास इस तरह की प्रक्रिया कराने का पूरा संवैधानिक अधिकार है.

Constitutional right to get SIR done EC big victory in Supreme Court said no flaw in the process
Image Source: Social Media

SC On SIR: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को बिहार में वोटर लिस्ट की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग के पास इस तरह की प्रक्रिया कराने का पूरा संवैधानिक अधिकार है.

अदालत ने इस प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी प्रमुख याचिकाओं को खारिज कर दिया और कहा कि चुनाव आयोग ने बिहार में SIR लागू करके किसी कानून या संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है. इस फैसले को चुनाव आयोग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कई महीनों से इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस चल रही थी.

वोटर लिस्ट को सही और साफ रखने के लिए जरूरी प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वोटर लिस्ट की शुद्धता बनाए रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है. कोर्ट के मुताबिक अगर मतदाता सूची में गलत, डुप्लीकेट या मृत लोगों के नाम बने रहते हैं, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है. इसलिए आयोग को समय-समय पर ऐसे विशेष संशोधन करने का अधिकार है.

अदालत ने कहा कि SIR जैसी प्रक्रिया का मकसद किसी नागरिक को परेशान करना नहीं बल्कि वोटर लिस्ट को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें.

चुनाव आयोग की शक्तियों पर उठे थे सवाल

इस मामले में दायर याचिकाओं में कहा गया था कि चुनाव आयोग ने अपनी सीमाओं से बाहर जाकर काम किया है. याचिकाकर्ताओं का दावा था कि संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत आयोग को इतने बड़े स्तर पर ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ चलाने का अधिकार नहीं है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मतदाता सूची तैयार करना, उसमें बदलाव करना और जरूरत पड़ने पर विशेष संशोधन करना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है.

लंबे समय तक चली सुनवाई

इस मामले पर कई महीनों तक सुनवाई चली. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अलग-अलग पक्षों की दलीलें सुनीं. अदालत ने पिछले साल 12 अगस्त को अंतिम बहस शुरू की थी और जनवरी में फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब कोर्ट ने अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला दिया है. इस मामले में चर्चित NGO डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के लिए एसोसिएशन (ADR) भी याचिकाकर्ताओं में शामिल था.

65 लाख वोटर्स के नाम हटने पर मचा था विवाद

SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने लगभग 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से हटाए थे. इन्हें लेकर काफी विवाद हुआ था. आयोग का कहना था कि इनमें कई लोग मृत पाए गए, कुछ दूसरे राज्यों या निर्वाचन क्षेत्रों में शिफ्ट हो चुके थे और कुछ के रिकॉर्ड में गड़बड़ी थी. 

वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में असली मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए हैं. इसी मुद्दे को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था.

‘NRC जैसी प्रक्रिया’ कहकर हुआ विरोध

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी कहा कि यह पूरी प्रक्रिया NRC जैसी लगती है. उनका आरोप था कि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच करने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है.

कुछ पक्षों ने कहा कि लोगों से पुश्तैनी दस्तावेज मांगना गरीब और ग्रामीण मतदाताओं के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है. हालांकि कोर्ट ने कहा कि आयोग का मकसद नागरिकता तय करना नहीं बल्कि मतदाता सूची को अपडेट करना है.

आधार और वोटर ID को लेकर भी हुई बहस

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि सिर्फ आधार कार्ड या वोटर ID को नागरिकता का अंतिम और पक्का सबूत नहीं माना जा सकता. SIR की अधिसूचना के मुताबिक जिन लोगों के नाम 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं थे, उन्हें अपने परिवार या पुश्तैनी संबंध से जुड़े कुछ दस्तावेज दिखाने थे.

इसी नियम को लेकर सबसे ज्यादा विवाद हुआ था. विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना था कि इससे कई गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को परेशानी हो सकती है.

चुनाव आयोग ने किया था प्रक्रिया का बचाव

चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा कि मतदाता सूची को सही रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है. आयोग ने दलील दी थी कि अगर समय-समय पर ऐसी जांच नहीं की जाएगी तो वोटर लिस्ट में गलत नाम बने रहेंगे, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. आयोग ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी तरीके से की गई है.

ये भी पढ़े- घर श्मशान जैसा महसूस... पॉडकास्ट में फूट-फूटकर रोई राखी सावंत, शादी को लेकर भी तोड़ी चुप्पी