26 नवंबर का दिन जब भी आता है, वह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को फिर से जीवंत कर देता है. संविधान दिवस के अवसर पर पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया और भारत की लोकतांत्रिक शक्ति को सलाम किया. इस ऐतिहासिक दिन पर उन्होंने न केवल संविधान के महत्व को रेखांकित किया बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत की ओर भी संकेत किया.
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान का मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओड़िया और असमिया सहित नौ भारतीय भाषाओं में अनुवादित संस्करण जारी किया. उन्होंने कहा कि 26 नवंबर 1949 का वही दिन था जब संविधान सभा ने इस केंद्रीय कक्ष में भारत के संविधान को अंतिम रूप दिया था और देश ने आधिकारिक रूप से इसे अंगीकार किया था. उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी देन बताया.
राष्ट्रपति ने प्रमुख सुधारों पर रखी अपनी बात
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने उन महत्वपूर्ण कदमों का उल्लेख किया जिन्होंने पिछले वर्षों में भारत के सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक ढांचे को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर रोक लगाकर संसद ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को एक नई दिशा दी. GST लागू होने को उन्होंने स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया. वहीं अनुच्छेद 370 हटाने को भारत के पूर्ण राजनीतिक एकीकरण की बड़ी उपलब्धि कहा. उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारत में महिला नेतृत्व के नए युग की शुरुआत बताया और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित राष्ट्रीय उत्सव का भी उल्लेख किया.
#WATCH | Delhi: President Droupadi Murmu says, "... By curbing the social evil associated with triple talaq, Parliament took historic steps toward the empowerment and social justice of our sisters and daughters. The Goods and Services Tax, the biggest tax reform since… pic.twitter.com/vtZLtXweuE
— ANI (@ANI) November 26, 2025
भारत एक है और हमेशा एक रहेगा
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने संविधान को भारत की सामूहिक सोच, त्याग और सपनों का प्रतिबिंब बताया. उन्होंने कहा कि संविधान सभा में हुए चिंतन और बहसों ने भारत की नींव को ऐसा स्वरूप दिया है जो आज पूरे विश्व में लोकतंत्र का सबसे मजबूत उदाहरण बन चुका है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की आत्मा उसकी एकता है और यह एकता सदियों तक कायम रहेगी.
महानुभावों की उपस्थिति में हुआ भव्य समारोह
इस राष्ट्रीय समारोह में देश के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति रही. राष्ट्रपति मुर्मू के साथ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री और कई सांसद इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बने. पुराना संसद भवन आज एक बार फिर इतिहास और वर्तमान के संगम का साक्षी बना.
यह भी पढ़ें: 'हमारा संविधान बराबरी और आज़ादी को अहमियत देता है', संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी का पोस्ट