सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बरार सिर्फ अपने लाजवाब व्यंजनों के लिए ही नहीं, बल्कि खाने से जुड़ी कहानियों और इतिहास को जीवंत अंदाज़ में पेश करने के लिए भी जाने जाते हैं. लखनऊ की गलियों में स्वाद की बारीकियां सीखने वाले रणवीर आज इंटरनेशनल किचन तक अपनी पहचान बना चुके हैं.
टीवी कुकिंग शोज की जजिंग से लेकर सोशल मीडिया पर वायरल रेसिपी वीडियो तक, रणवीर हर जगह चर्चा में रहते हैं. लेकिन कुछ समय पहले ‘द कपिल शर्मा शो’ में उन्होंने अपने किचन से जुड़ा ऐसा राज खोला, जिसने सबको चौंका दिया उनके पास एक ऐसा चाकू है, जिसकी कीमत करीब 1.75 लाख रुपये है.
आखिर इतना खास क्यों है रणवीर का चाकू?
शो के दौरान अर्चना पूरन सिंह ने जब मज़ाकिया लहजे में उनसे पूछा कि एक चाकू में ऐसा क्या खास हो सकता है, तो रणवीर ने बड़ी सादगी से जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जैसे किसी को महंगी घड़ियों या कारों का शौक होता है, वैसे ही एक शेफ के लिए सबसे बड़ी चीज़ उसका चाकू होता है. रणवीर के मुताबिक, उनका यह चाकू कोई आम किचन टूल नहीं है. यह 18वीं सदी की एक समुराई तलवार का हिस्सा है, जिससे इसे तैयार किया गया है. चाकू के साथ उसकी प्रामाणिकता का सर्टिफिकेट और उस समुराई परिवार का इतिहास भी मिला है, जिससे यह तलवार जुड़ी रही. रणवीर का कहना है कि जब वे इस चाकू को हाथ में लेते हैं, तो ऐसा महसूस होता है जैसे वे इतिहास के किसी जीवित टुकड़े को छू रहे हों.
इतिहास से जुड़ाव का अहसास
रणवीर बरार मानते हैं कि यह चाकू सिर्फ काटने का औज़ार नहीं, बल्कि एक भावना है. उन्होंने बताया कि कभी-कभी वे इस चाकू का इस्तेमाल भी करते हैं और समय के साथ यह उनके शरीर का ही हिस्सा बन गया है. एक शेफ के लिए अपने औज़ार से ऐसा जुड़ाव होना बहुत मायने रखता है.
कैसी होती थीं 18वीं सदी की समुराई तलवारें?
रणवीर के चाकू को किस समुराई की तलवार से बनाया गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन 18वीं सदी की समुराई तलवारों की खासियतें आज भी दुनिया भर में मशहूर हैं. उस दौर को जापान में ‘एडो काल’ कहा जाता है. इस समय की समुराई तलवारें, खासतौर पर कटाना, अपनी बेहतरीन मजबूती और धार के लिए जानी जाती थीं. ये तलवारें हल्की घुमावदार, एक धार वाली और बेहद संतुलित होती थीं. युद्ध कम होने के बाद इन तलवारों को सजावटी और कलात्मक रूप भी दिया जाने लगा था, लेकिन उनकी क्वालिटी और तकनीक से कोई समझौता नहीं किया गया.
स्टील और कारीगरी का कमाल
समुराई तलवारें खास तामाहागाने स्टील से बनाई जाती थीं, जिसे कई बार मोड़कर शुद्ध किया जाता था. इससे ब्लेड में अनोखे पैटर्न बनते थे और धार बेहद तेज़ होती थी. डिफरेंशियल हार्डनिंग तकनीक के कारण ब्लेड की धार सख्त रहती थी, जबकि बाकी हिस्सा लचीला होता था, जिससे तलवार टिकाऊ बनती थी. यही वजह है कि जब ऐसी ऐतिहासिक तलवार का हिस्सा एक चाकू में ढलता है, तो उसकी कीमत सिर्फ पैसों में नहीं, बल्कि विरासत और कला में भी मापी जाती है. रणवीर बरार का यह चाकू उसी विरासत की एक झलक है, जो उनके किचन को इतिहास से जोड़ता है.
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