पीएम मोदी से मिले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर, रक्षा, ट्रेड और टेक्नोलॉजी पर बातचीत, जानें एजेंडा

भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम तब देखा गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मुंबई में मुलाकात कर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया.

British Prime Minister Keir Starmer met PM Modi
Image Source: Social Media

मुंबई: भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम तब देखा गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मुंबई में मुलाकात कर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया. इस मुलाकात का केंद्र बिंदु रहा व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर बुधवार सुबह भारत पहुंचे थे. वह ब्रिटेन के 125 प्रमुख व्यापारिक नेताओं, निवेशकों, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल के साथ दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं.

व्यापारिक साझेदारी को मिली नई दिशा

दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) को ऐतिहासिक बताते हुए नेताओं ने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए "नया युग" बताया. यह समझौता दो महीने पहले ही अंतिम रूप दिया गया था, और इसका औपचारिक ऐलान प्रधानमंत्री मोदी की जुलाई में लंदन यात्रा के दौरान किया गया था.

ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने इस समझौते को सिर्फ औपचारिक कागज का टुकड़ा नहीं बल्कि "विकास का लॉन्चपैड" बताया. उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक सहयोग आने वाले वर्षों में अप्रत्याशित ऊंचाई छू सकता है.

स्टार्मर ने कहा, "भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है. ऐसे में ब्रिटेन के लिए भारत के साथ सहयोग को गहराना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत है."

2030 तक व्यापार दोगुना होने की उम्मीद

भारत और ब्रिटेन दोनों का लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जाए. इसके लिए बाजारों तक पहुंच को आसान बनाना, सीमा शुल्क कम करना, और निवेश की बाधाओं को दूर करना प्राथमिकता में शामिल है.

दोनों नेताओं ने यह स्वीकार किया कि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए रोजगार के अवसर, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, और शिक्षा व अनुसंधान में सहयोग के नए द्वार खुलेंगे.

तकनीकी और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों (critical and emerging technologies) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, ग्रीन टेक्नोलॉजी, और डिजिटल इनोवेशन शामिल हैं.

साथ ही, रक्षा और रणनीतिक सुरक्षा साझेदारी को भी और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई. भारत और ब्रिटेन पहले से ही रक्षा सहयोग के कई क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास, रक्षा उपकरणों के विकास और समुद्री सुरक्षा पर कार्य कर रहे हैं.

आतंकवाद और खालिस्तान मुद्दे पर चिंता

जानकारी के अनुसार, भारतीय पक्ष ने इस मुलाकात के दौरान ब्रिटेन की धरती पर खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियों पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की. भारत ने यह मुद्दा पहले भी कई बार उठाया है, और इस बार एक बार फिर स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया गया कि उग्रवादी गतिविधियों को लोकतांत्रिक मूल्यों के नाम पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

ब्रिटेन में सक्रिय कुछ चरमपंथी संगठनों द्वारा भारत विरोधी प्रचार, विशेष रूप से पंजाब को लेकर चलाए जा रहे अलगाववादी एजेंडे पर भारत की प्रतिक्रिया काफी सख्त रही है.

भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठा

सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में भारत ने ब्रिटेन में रह रहे विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठाया. भारत लंबे समय से इन मामलों में ब्रिटेन के सहयोग की मांग करता आ रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में भारत की नीति स्पष्ट है- दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना जरूरी है, चाहे वे कहीं भी हों.

शिक्षा, कौशल और स्टार्टअप पर भी चर्चा

दोनों नेताओं ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग पर भी सहमति जताई. ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों और भारतीय संस्थानों के बीच संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों, रिसर्च एक्सचेंज और छात्रवृत्ति योजनाओं को बढ़ावा देने की योजनाएं बनाई जा रही हैं.

इसके अलावा, स्टार्टअप, नवाचार और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई. ब्रिटिश कंपनियों ने भारतीय डिजिटल इकोनॉमी में निवेश करने में रुचि दिखाई है, जो दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुकी है.

ये भी पढ़ें- 'ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ इंजन है भारत, चीन की रफ्तार धीमी', IMF चीफ का दावा, ट्रंप का टैरिफ हुआ बेअसर