नई दिल्ली: भारत24 के कॉन्क्लेव भारत उदय समिट में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा खास मेहमान के तौर पर शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन के 25 साल, उनके काम करने के तरीके, देश में आए बदलाव, युवाओं की आकांक्षाओं एवं विपक्ष की राजनीति जैसे कई मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए.
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर के 25 साल पूरे हो रहे हैं. दिल्ली में इसे किस तरह देखा जा रहा है और किस तरह से उनके 25 साल के सफर को सेलिब्रेट किया जा रहा है?
जवाब: पूरे देश के लिए यह सौभाग्य की बात है कि हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व मिला है. 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने काम शुरू किया और गुजरात के विकास को एक नई दिशा दी. गुजरात का विकास मॉडल पूरे देश के लिए मार्गदर्शन बना. नर्मदा की नहरों पर सोलर पावर का इस्तेमाल, साबरमती रिवरफ्रंट और गुजरात में इंडस्ट्रियलाइजेशन जैसे कई काम उनकी कार्यशैली को दर्शाते हैं. करीब 13 साल के कार्यकाल में गुजरात को देश के प्रमुख बिजनेस राज्यों में शामिल किया गया और इसी विकास के कारण 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने. प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपनी सरकार को गरीबों को समर्पित सरकार बताया और पिछले वर्षों में गरीब कल्याण से जुड़ी कई योजनाएं शुरू की गईं.
सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की ऐसी कौन-सी खासियत है, जिसे आम लोगों को अपनी जिंदगी में भी अपनाना चाहिए?
जवाब: प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तित्व बेहद संवेदनशील है. इतनी बड़ी जिम्मेदारी होने के बावजूद उन्हें यह पता है कि रेहड़ी-पटरी वाला अपना जीवन किस तरह चलाता है. प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना इसका उदाहरण है, जिसके जरिए रेहड़ी-पटरी वालों को आसान किस्तों पर आर्थिक मदद दी जाती है. इसके अलावा प्रधानमंत्री लगातार लोगों को फिटनेस, योग और एक्सरसाइज के लिए प्रेरित करते हैं. वह मोटापे को लेकर भी जागरूक करते हैं और डाइट में 10 प्रतिशत तेल कम करने की बात कहते हैं. उनकी सबसे बड़ी विशेषताओं में देशवासियों के प्रति संवेदनशीलता और 24/7 ईमानदारी के साथ काम करने की भावना शामिल है.
सवाल: दिल्ली में ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या है. क्या इसका कोई स्थायी समाधान दिखाई दे रहा है?
जवाब: दिल्ली में ट्रैफिक कम करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर यूईआर-2 करीब 70 किलोमीटर का आउटर रिंग रोड है, जिसके जरिए सोनीपत, हरियाणा और दूसरी तरफ से आने वाले लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में काफी समय की बचत होती है. द्वारका एक्सप्रेसवे के कारण दिल्ली-गुरुग्राम मार्ग पर भी दबाव कम हुआ है. इसके अलावा शिवमूर्ति से नेल्सन मंडेला मार्ग तक करीब 5 किलोमीटर लंबी टनल का प्रोजेक्ट करीब 8 हजार करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है. इसका डीपीआर लगभग पूरा हो चुका है और इसे अगले चार साल में पूरा करने का लक्ष्य है.
सवाल: दिल्ली को डीकंजेस्ट करने के लिए और किन सड़कों पर काम किया जा रहा है?
जवाब: दिल्ली की तीन प्रमुख लाइफलाइन रोड्स को सिग्नल फ्री करने की योजना है. पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर, महरौली-गुरुग्राम रोड और आश्रम से बदरपुर तक के मार्ग को लेकर काम किया जा रहा है. इन सड़कों पर जरूरत के मुताबिक फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड बनाए जाएंगे. पंजाबी बाग-टिकरी बॉर्डर रोड पर करीब 8 किलोमीटर का एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है. इन परियोजनाओं के जरिए जिन रास्तों पर अभी एक से डेढ़ घंटे तक लगते हैं, वहां यात्रा का समय करीब 20 से 25 मिनट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है.
सवाल: नोएडा, मयूर विहार और कालिंदी कुंज की तरफ से आने वाले ट्रैफिक को लेकर क्या योजना है?
जवाब: बारापुला के थर्ड लीफ के शुरू होने से मयूर विहार की तरफ से आने वाले लोगों को राहत मिली है. इसके जरिए सराय काले खां और बारापुला क्षेत्र तक पहुंचने में समय कम हुआ है. कालिंदी कुंज भी एक महत्वपूर्ण कंजेस्टेड पॉइंट है, जहां मेट्रो, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, फरीदाबाद और दूसरे मार्गों का ट्रैफिक आता है. यहां करीब एक किलोमीटर का सिग्नल-फ्री चौराहा विकसित किया जा रहा है. इसके पूरा होने के बाद मौजूदा जाम की स्थिति में कमी आने और ट्रैफिक को कुछ ही मिनटों में निकालने का लक्ष्य है.
सवाल: सर्दियों में दिल्ली में प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है. नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर कितना ध्यान दिया जा रहा है?
जवाब: प्रदूषण ऐसी समस्या है जिसे एक दिन में खत्म नहीं किया जा सकता और इसमें सरकार के साथ जनता की भागीदारी भी जरूरी है. दिल्ली में ओखला, गाजीपुर और भलस्वा के कूड़े के पहाड़ों को कम करने के लिए काम चल रहा है. इन लैंडफिल साइट्स पर वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण किया जा रहा है. कचरे से बिजली और कंबश्चिबल फ्यूल बनाने के साथ-साथ उससे निकलने वाली सामग्री को रिसाइकल कर ईंट, रोडी-बदरपुर और टाइल्स जैसी चीजें तैयार की जा रही हैं. प्लास्टिक वेस्ट का इस्तेमाल सड़क निर्माण में भी किया जा रहा है. यूईआर-2 और द्वारका एक्सप्रेसवे में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक वेस्ट का इस्तेमाल किया गया है. लक्ष्य है कि 2028 के अंत तक दिल्ली के तीनों बड़े कूड़े के पहाड़ खत्म किए जाएं.
सवाल: देश में हर साल बड़ी संख्या में सड़क हादसे होते हैं. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह क्या है और सरकार क्या कदम उठा रही है?
जवाब: सड़क हादसे एक गंभीर समस्या हैं. देश में हर साल बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं होती हैं और करीब 1.70 लाख लोगों की जान जाती है. नेशनल हाईवे पर हादसों वाले ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें खत्म करने का काम किया जा रहा है. करीब 14 हजार डार्क स्पॉट्स को आइडेंटिफाई करके उन्हें ठीक किया गया है. लेकिन सड़क सुरक्षा में जनता की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है. हेलमेट पहनना, ओवरस्पीडिंग से बचना और ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी है. हादसों में युवाओं की बड़ी संख्या में मौत होती है, इसलिए युवाओं के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है.
सवाल: यमुना की सफाई को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. अब इस दिशा में क्या काम हो रहा है?
जवाब: यमुना की सफाई के लिए एक्शन प्लान पर काम शुरू किया गया है. दिल्ली में यमुना में 22 बड़े नालों के जरिए सीवेज पहुंचता है. इन नालों के मुहानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए टेंडरिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 12 जगहों पर काम शुरू हो गया है. अगले कुछ महीनों में बाकी स्थानों पर भी काम शुरू होने की बात है. लक्ष्य है कि 2029 के अंत तक सीवेज का गंदा पानी यमुना में जाने से रोका जाए और साफ पानी नदी में पहुंचे. इसके साथ ही यमुना में मौजूद प्रदूषण को मैकेनिकल तरीके से हटाने का काम भी जारी है.
सवाल: विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को देखते हुए देश का रोड नेटवर्क किस तरह का होना चाहिए?
जवाब: विकसित भारत के लिए मजबूत रोड नेटवर्क बेहद जरूरी है. 2014 से पहले देश में करीब 92 हजार किलोमीटर नेशनल हाईवे थे. पिछले 12 वर्षों में करीब 60 हजार किलोमीटर नए नेशनल हाईवे बनाए गए हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों को हाईवे नेटवर्क से जोड़ने का काम हुआ है. इसके अलावा ग्रामीण सड़कों का नेटवर्क भी लगातार बढ़ा है. इससे गांवों में पैदा होने वाला दूध, फल, सब्जियां और दूसरे कृषि उत्पाद कम समय में मंडियों तक पहुंच सकते हैं. सड़कें सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं हैं, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था और विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाने वाला नेटवर्क हैं.
सवाल: दिल्ली और देश के विकास को लेकर आगे आपकी प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?
जवाब: दिल्ली को ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रहेगा. सड़कों को सिग्नल फ्री करना, नए फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड बनाना, कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और यमुना की सफाई जैसे काम आगे बढ़ाए जाएंगे. लक्ष्य है कि दिल्ली की कनेक्टिविटी बेहतर हो, लोगों का समय बचे और शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर पर्यावरण के अनुकूल बने.
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