हत्या, यातना, भड़काऊ बयानबाजी और... शेख हसीना को किन मामलों में सुनाई गई सजा-ए-मौत?

Sheikh Hasina Case Summary: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया है. उन्हें पांच गंभीर आरोपों में फांसी की सजा सुनाई गई है.

Bangladesh former pm Sheikh Hasina sentenced to death know full Case Summary
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Sheikh Hasina Case Summary: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया है. उन्हें पांच गंभीर आरोपों में फांसी की सजा सुनाई गई है. यह फैसला बांग्लादेश के 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण' द्वारा शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून के खिलाफ सुनाया गया. इस फैसले के बाद से देश में तनाव बढ़ गया है और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग ने इस फैसले के विरोध में बंद का एलान किया है. इस लेख में हम शेख हसीना पर लगाए गए आरोपों और उनके अपील की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानेंगे.

इन आरोपों में शेख हसीना को ठहराया गया दोषी 

पहला आरोप: अदालत ने शेख हसीना और अन्य आरोपियों पर हत्या, हत्या के प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्यों का आरोप लगाया. आरोप था कि शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग ने नागरिकों के खिलाफ इन अपराधों को बढ़ावा दिया और इनमें भाग लिया. इसके अलावा, शेख हसीना की 14 जुलाई की प्रेस वार्ता के बाद, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक मामून और अन्य उच्च अधिकारियों ने इन अपराधों में सहयोग और सहायता की थी.

दूसरा आरोप: शेख हसीना पर आरोप था कि उन्होंने हेलीकॉप्टरों, ड्रोनों और घातक हथियारों के इस्तेमाल से छात्र प्रदर्शनकारियों को कुचलने का आदेश दिया. अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि तत्कालीन गृह मंत्री और पुलिस महानिरीक्षक ने कानून प्रवर्तन कर्मियों को निर्देश देकर इस हिंसा में मदद की थी.

तीसरा आरोप: शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल, साथ ही पुलिस प्रमुख मामून पर आरोप था कि उन्होंने रंगपुर स्थित बेगम रोकैया विश्वविद्यालय के पास एक छात्र अबू सईद की हत्या की साजिश रची. आरोप था कि शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए और घातक हथियारों का इस्तेमाल करने का आदेश दिया.

चौथा आरोप: अभियुक्तों पर पिछले साल 5 अगस्त को ढाका के चंखरपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों को गोली मारकर हत्या करने का आरोप था. अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह हत्या अभियुक्तों के आदेश, उकसावे और साजिश के तहत की गई थी, जो मानवता के खिलाफ अपराध था.

पांचवां आरोप: शेख हसीना और अन्य आरोपियों पर 5 अगस्त को अशुलिया में छह छात्र प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था. इनमें से पांच शवों को जलाकर नष्ट कर दिया गया था, जबकि एक को जीवित रहते हुए जलाने का आरोप था.

शेख हसीना की अपील और आगे की राह

वर्तमान में शेख हसीना भारत में हैं, और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने साफ कर दिया है कि न्यायाधिकरण के फैसले पर तुरंत अमल किया जाएगा. बांग्लादेश के गृह सलाहकार ने कहा कि दोषी को अपील करने के लिए गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण करना होगा. इसके बिना, दोषी अपील दायर नहीं कर सकते. रिपोर्ट के अनुसार, अपील दायर करने की समय सीमा 30 दिन है और उच्च न्यायालय को 60 दिनों के भीतर इसका निपटारा करना होगा.

इस फैसले के बाद शेख हसीना के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. उनके लिए अपील की प्रक्रिया लंबी और कठिन हो सकती है, क्योंकि उन्हें या तो गिरफ्तार होना होगा या आत्मसमर्पण करना होगा. इस समय बांग्लादेश की राजनीति में उथल-पुथल का माहौल है, और यह देखना होगा कि शेख हसीना इस फैसले का सामना कैसे करती हैं.

राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप

शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग का कहना है कि यह सभी मुकदमे राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दायर किए गए हैं. उनका आरोप है कि विरोधी पार्टी ने उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं, ताकि उन्हें निशाना बनाया जा सके. हालांकि, अदालत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए शेख हसीना को दोषी ठहराया. 

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