बीजिंग: चीन की सत्ता और सेना के गलियारों में इन दिनों जबरदस्त हलचल है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हटाने या नुकसान पहुंचाने की कोई अंदरूनी साजिश रची गई थी? यह अटकलें तब तेज हो गईं, जब चीनी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सबसे ताकतवर अधिकारियों में गिने जाने वाले जनरल झांग यूश्या जांच के दायरे में आ गए हैं.
झांग यूश्या लंबे समय से शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं. लेकिन अब उन पर “अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन” के आरोप लगाए गए हैं. चीन में इस तरह की भाषा आमतौर पर बेहद गंभीर संकेत मानी जाती है और अक्सर इसका अंत पद से हटाने, राजनीतिक पतन और कड़ी सजा में होता है.
कौन हैं झांग यूश्या, जिनसे कांप उठी चीनी सेना?
झांग यूश्या चीन की सर्वोच्च सैन्य संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस चेयरमैन हैं. इस पद का मतलब है कि वह सीधे तौर पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चीनी सेना की कमान संभालते रहे हैं.
75 वर्षीय झांग ने 1968 में सेना जॉइन की थी और जमीनी युद्धक इकाइयों से निकलकर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे. PLA में उन्हें एक अनुभवी, सख्त और रणनीतिक सोच रखने वाला जनरल माना जाता रहा है. यही वजह है कि उनके खिलाफ जांच की खबर सामने आते ही पूरे सैन्य तंत्र में खलबली मच गई.
रक्षा मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि झांग पर किस तरह के आरोप हैं, लेकिन चीन में “अनुशासन उल्लंघन” शब्द अक्सर भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग या पार्टी लाइन से हटकर काम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
क्या शी जिनपिंग को हटाने की अंदरूनी कोशिश?
झांग यूश्या और सैन्य रणनीति से जुड़े एक अन्य शीर्ष अधिकारी ल्यू झेनली के खिलाफ अचानक शुरू हुई जांच ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई है, या फिर शी जिनपिंग ने अपने खिलाफ सक्रिय किसी गुट पर बड़ा वार किया है?
चीन मामलों की विशेषज्ञ और मानवाधिकार कार्यकर्ता जेनिफर जेंग का दावा इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बना देता है. उनके अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर लंबे समय से शी जिनपिंग की शक्ति को सीमित करने की कोशिशें चल रही थीं, और झांग यूश्या इसी समूह का हिस्सा हो सकते हैं.
जेंग का कहना है कि यह गुट पुराने कम्युनिस्ट नेताओं के साथ मिलकर सत्ता का संतुलन बदलना चाहता था, हालांकि उनका मकसद पार्टी को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे पुराने ढांचे में वापस लाना था.
पुराने दिग्गज और सत्ता संतुलन की लड़ाई
जेनिफर जेंग के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ, पूर्व प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और झांग यूश्या जैसे प्रभावशाली चेहरे शी जिनपिंग की बढ़ती पकड़ से असहज थे. ये लोग चीन को फिर से देंग शियाओपिंग के दौर जैसी सामूहिक नेतृत्व व्यवस्था में ले जाना चाहते थे.
लेकिन जेंग का दावा है कि इन नेताओं ने निर्णायक कदम उठाने में देर कर दी, और यही उनकी सबसे बड़ी चूक साबित हुई. इसी बीच शी जिनपिंग ने हालात को भांपते हुए पलटवार की रणनीति अपनाई.
क्या बीमारी की खबरें थीं रणनीति का हिस्सा?
दिलचस्प दावा यह भी है कि हाल ही में शी जिनपिंग की तबीयत खराब होने और उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबरें महज संयोग नहीं थीं. जेनिफर जेंग के अनुसार, यह एक रणनीतिक चाल थी, ताकि संभावित विरोधियों को भ्रम में रखा जा सके.
इसी दौरान एक अहम बैठक में झांग यूश्या केवल चार सुरक्षाकर्मियों के साथ पहुंचे. वहीं पहले से मौजूद सौ से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और हिरासत में ले लिया. कुछ रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि झांग वास्तव में शी जिनपिंग को हटाने की योजना पर काम कर रहे थे, लेकिन इसकी भनक पहले ही लग गई थी.
शी जिनपिंग का सख्त संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कार्रवाई की जानकारी बेहद तेजी से सार्वजनिक की गई, जो अपने आप में एक बड़ा संकेत है. इससे पहले एक अन्य वाइस चेयरमैन हे वेइडोंग को हटाने की खबर महीनों बाद सामने आई थी.
जानकारों के अनुसार, झांग यूश्या के मामले में जल्दी घोषणा करना जरूरी था, ताकि यह साफ संदेश दिया जा सके कि शी जिनपिंग पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी भी तरह की अंदरूनी चुनौती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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