इस्लामाबाद में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के सम्मान में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर ने भारत को लेकर नया बयान दिया. समारोह में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मई 2024 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीमित सैन्य तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने “दृढ़ता और संकल्प” के साथ स्थिति का सामना किया.
जनरल मुनीर ने दावा किया कि मई में हुए संघर्ष के दिनों में पाकिस्तान ने “हर चुनौती का मजबूती से जवाब” दिया. उनके अनुसार, यदि भविष्य में कोई बाहरी शक्ति पाकिस्तान पर युद्ध थोपने का प्रयास करती है, तो उसे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा.
मुसलमान विश्वास और दृढ़ता से लड़ता है
मुनीर ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सेना “अपने सिद्धांतों और विश्वासों के अनुसार देश की रक्षा” करती है. उन्होंने अपने भाषण में धार्मिक संदर्भ भी जोड़े और कहा कि जब मुसलमान विश्वास और दृढ़ता से लड़ता है तो “साधन सीमित होने पर भी परिणाम उसके पक्ष में जा सकते हैं.”
ध्यान देने योग्य है कि भारत की ओर से मई में किसी प्रकार के औपचारिक युद्ध या हमले की पुष्टि नहीं की गई है. हालांकि, दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर समय-समय पर तनाव की घटनाएँ सामने आती रहती हैं.
जॉर्डन के साथ रक्षा सहयोग पर जोर
समारोह में जनरल मुनीर और जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के बीच रक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान जॉर्डन के साथ सैन्य समझ और संयुक्त सुरक्षा दृष्टिकोण को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच रक्षा प्रशिक्षण, सैन्य विनिमय कार्यक्रमों और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा. पाकिस्तान पहले ही कई अरब देशों के साथ रक्षा साझेदारी बढ़ाने में सक्रिय है, जिसमें हाल ही में सऊदी अरब के साथ हुआ रक्षा समझौता भी शामिल है.
जॉर्डन के राजा का पाकिस्तान दौरा
किंग अब्दुल्ला द्वितीय दो दिवसीय यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे हैं. उनके साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है. इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक, सैन्य और राजनीतिक सहयोग को नई दिशा देना है.
जॉर्डन और पाकिस्तान लंबे समय से रक्षा प्रशिक्षण, सुरक्षा सहयोग और खुफिया आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग करते रहे हैं. किंग अब्दुल्ला की यह यात्रा क्षेत्रीय स्थिरता और मध्य-पूर्व तथा दक्षिण एशिया के बीच बढ़ते सामरिक संबंधों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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