मध्य प्रदेश के रीवा में शनिवार (1 नवंबर, 2025) को भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर देश की सैन्य शक्ति और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” न केवल एक रणनीतिक विजय थी, बल्कि यह भारत की संप्रभुता, अखंडता और आत्मसम्मान की प्रतीक बन चुकी है. जनरल द्विवेदी ने इस ऑपरेशन को “पूरी तरह सफल” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह सेनाओं को खुली छूट दी, वैसा भारतीय इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ.
रीवा के टीआरएस कॉलेज में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जनरल द्विवेदी ने देश के युवाओं, पूर्व सैनिकों और छात्रों को संबोधित किया. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने न केवल ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति और सफलता पर विस्तार से बात की, बल्कि आने वाली सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर भी अपनी राय रखी.
ऑपरेशन सिंदूर” एक सैन्य नहीं, बल्कि राष्ट्र का आत्मविश्वास
सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य केवल दुश्मन पर जीत हासिल करना नहीं था, बल्कि भारत की संप्रभुता और शांति की पुनर्स्थापना करना था. उन्होंने कहा, कि यह प्रधानमंत्री ही थे जिन्होंने इस मिशन का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा. जब भी कोई महिला अपने माथे पर सिंदूर लगाती है, तो वह देश के उन सैनिकों की सुरक्षा के लिए दुआ करती है जो सीमाओं पर तैनात हैं. यही भावना इस ऑपरेशन की आत्मा थी. उन्होंने आगे कहा कि इस अभियान के दौरान तीनों सेनाओं थल, जल और वायु ने अभूतपूर्व तालमेल दिखाया, और यही अनुशासन और एकजुटता भारत की सबसे बड़ी ताकत है.
#WATCH | Rewa, Madhya Pradesh | Addressing an event at TRS College, Chief of the Army Staff, General Upendra Dwivedi says, "...Other than gaining the victory over the enemy, Operation Sindoor was to re-establish sovereignty, integrity and peace... It was the Prime Minister who… pic.twitter.com/LhvW9PxR22
— ANI (@ANI) November 1, 2025
सेनाओं को मिली खुली छूट, इतिहास में पहली बार
जनरल द्विवेदी ने कहा कि इस अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सेनाओं को ‘पूरी छूट’ दी थी.हमने हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया, और आवश्यक होने पर सीमा पार 100 किलोमीटर तक घुसकर कार्रवाई की. हमारे राजनीतिक नेतृत्व की मंशा एकदम स्पष्ट थी. देश की सुरक्षा सर्वोपरि है.उन्होंने कहा कि इस बार की रणनीति केवल प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि सटीक और निर्णायक प्रहार की नीति पर आधारित थी.
भविष्य की चुनौतियों पर चेतावनी “जमीन से अंतरिक्ष तक युद्ध का नया दौर”
अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि आने वाला समय “अनिश्चितता, जटिलता और अस्थिरता” से भरा होगा. अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा. यह अंतरिक्ष, उपग्रह, साइबर नेटवर्क और सूचना के क्षेत्र तक फैल चुका है. रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल युद्ध की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सोशल मीडिया और अफवाहों ने कई बार सेना की सूचनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की, जिससे सूचना युद्ध (Information Warfare) की गंभीरता समझ में आई.
उन्हें भी नहीं पता कि वो कल क्या करेंगे
अपने संबोधन के दौरान जनरल द्विवेदी ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, कि आज दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि किसी को नहीं पता भविष्य में क्या होगा. ट्रंप आज क्या कर रहे हैं, शायद उन्हें खुद भी नहीं पता कि वो कल क्या करने वाले हैं. उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे अनिश्चित माहौल में हमेशा सतर्क रहना होगा और नई तकनीकों के साथ खुद को अपडेट करना होगा.
ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए भी सेना पूरी तरह तैयार
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ऐसे किसी अभियान के लिए फिर तैयार है, तो उन्होंने कहा, कि ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए हमने पूरी तैयारी कर ली है. अगर पाकिस्तान ने कोई भी कायराना हरकत की, तो जवाब पहले से भी ज्यादा कठोर होगा. उन्होंने कहा कि भारत आज किसी भी दिशा से आने वाली चुनौती का मुकाबला करने के लिए तैयार है. चाहे वह सीमाओं पर हो, समुद्र में या अंतरिक्ष में.
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